क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना व बहनोई गजनबी समेत परिवार के आठ लोगों द्वारा ली गई मनरेगा मजदूरी का मामला पिछले एक सप्ताह से सुर्खियों में बना हुआ था। इसके लिए डीएम निधि गुप्ता वत्स ने परियोजना निदेशक व डीसी मनरेगा अमरेंद्र प्रताप सिंह को जांच सौंपी थी। कमेटी पिछले एक सप्ताह से फर्जीवाड़े के हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही थी। जांच के दौरान परिवार के आठ लोगों समेत कुल 18 लोगों द्वारा बिना मजदूरी किए 8.68 लाख रुपये की रकम निकालना सामने आया है।
इसमें ब्लॉक के कर्मचारी भी दोषी पाए गए हैं। जांच कमेटी ने एक तत्कालीन बीडीओ प्रतिभा अग्रवाल को भी दोषी पाया है। इसके अलावा चार सचिव, एक रोजगार सेवक, एक कंप्यूटर ऑपरेटर, एक एपीओ, एक तकनीकी सहायक व एक लेखाकार को भी दोषी पाया गया है। मामले में तीन सचिवों समेत सभी दोषी कर्मियों पर एफआईआर के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई की जाएगी, जबकि एक सचिव पर केवल विभागीय कार्रवाई होगी। वहीं ग्राम प्रधान गुले आयशा से सभी लोगों द्वारा मजदूरी के रूप में निकाले गए 8.68 लाख रुपये के मामले में रिकवरी के साथ-साथ अधिकार सीज होने की कार्रवाई की जाएगी।