मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच छिड़ी जंग में संतुलन बनाने में नाकाम जिले के चार विधायकों को मोहरा बनने की कीमत टिकट कटवाकर चुकानी पड़ी। दरअसल सरकार को खुश करने के कवायद में चारों विधायकों ने संगठन से दूरी बना ली थी।
नौबत यहां तक पहुंच गई कि सीएम अखिलेश यादव की रथयात्रा के दौरान लगे होर्डिंग - बैनर और पोस्टरों तक से शिवपाल नदारद दिखे। जिन विधायकों का टिकट कटा है उनमें से कुछ ने शिवपाल के खिलाफ खुली बयानबाजी की तो कुछ ने कहा था कि चाचा - भतीजे की जंग में वो सीएम के साथ हैं।
समाजवादी परिवार में छिड़ी जंग जग - जाहिर होने के बाद शिवपाल यादव जब मुरादाबाद पहुंचे थे तो चंद नेताओं को छोड़ बाकी सपा नेताओं ने उनसे दूरी बनाना बेहतर समझा। सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष हाजी इकराम कुरैशी हों या फिर दूसरे सपा नेता और कई विधायक, सभी शिवपाल से दूर रहे।
शिवपाल और अखिलेश की जंग जब थोड़ा और बढ़ी तो विधायकों ने बयानबाजी भी शुरू कर दी। हद तो तब हो गई सपा के कार्यालयों से शिवपाल की तस्वीरें उतार दी गईं और सीएम की रथ यात्रा के दौरान शहर से लेकर हवाई पट्टी तक लगाए गए होर्डिंग - बैनरों से शिवपाल सिरे से गायब दिखे।
जिन विधायकों का टिकट कटा है उनमें शहर विधायक यूसुफ अंसारी का टिकट कटवाने को पार्टी का एक धड़ा पहले से सक्रिय था। ठाकुरद्वारा विधायक को शिवपाल से दूरी बनाना ले डूबा और फहीम को भी शिवपाल से बेरुखी भारी पड़ी।