विधानसभा में बोलते कांठ विधायक कमाल अख्तर। स्रोत: स्वयं
कांठ। विधानसभा सत्र के दौरान कांठ विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर ने नारी शक्ति वंदन महिला आरक्षण बिल पर बोलते कहा कि सरकार यदि वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है तो ऐसा कानून बनाए, जिसमें हर राजनीतिक दल को कम से कम 33 प्रतिशत महिलाओं को चुनाव लड़ाना अनिवार्य हो सके, इससे महिलाओं का नेतृत्व स्वाभाविक रूप से मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल 2011 में संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, उस समय स्पष्ट हुआ था कि पहले जनगणना कराई जाएगी और इसके बाद ही इस बिल को लागू किया जाएगा, लेकिन अब जब देश में चुनावी माहौल बन रहा है तो 2011 की जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण लागू करने हो रही है, जो पूरी तरह से गलत है। विधायक ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में भागीदारी देना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन केवल आरक्षण देने से वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं होगा, जब तक महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस कार्य नहीं किया जाता, तब तक यह अधूरा ही रहेगा। उन्होंने विधानसभा में सुझाव देते हुए कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे जमीनी स्तर पर लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने सामूहिक विवाह योजनाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थी महिलाओं के खातों में जांच के बाद स्थानांतरित की जानी चाहिए।