महानगर की बड़ी दवा निर्माता कंपनी डीके फार्मा टेबलेट की एंटीबायोटिक दवा का सैंपल जांच में फेल हो गया। स्टेट लैब की जांच में पाया गया कि सिप्रोफ्लोक्सासिन की टेबलेट में पांच सौ मिलीग्राम के स्थान पर मात्र ढाई एमजी (2. 63 एमजी) दवा (बेस साल्ट) मिली है। अब कंपनी के खिलाफ नकली दवा बनाने के मामले में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
प्रिंस रोड स्थित डीके फार्मा कंपनी की दवा अधोमानक मिलने पर दवा निर्माण बंद करा दिया गया था। कंपनी की दवा की बाजार में मांग थी। ऐसे में कंपनी मालिक ने बंद कंपनी को चुपचाप शुरू कर दवा का निर्माण शुरू कर दिया था। अफसरों ने 14 फरवरी को बंद कंपनी में दवा बनते पकड़ा था। इस दौरान दवाओं के पांच सैंपल लेकर जांच को भेजे गए थे। अफसरों को कंपनी में दवा बनाने का बेस साल्ट नहीं मिला था।
इनमें से एक सैंपल की रिपोर्ट अफसरों को प्राप्त हो गई है। डीकेफार्मा टेबलेट कंपनी की कई राज्यों में बिकने वाली एंटीबायोटिक्स सिप्रोफ्लोक्सासिन स्टेट लैब की रिपोर्ट में फेल मिली है। यह टेबलेट सिप्रोफ्लोक्स पांच सौ एमजी की टेबलेट में मात्र ढाई एमजी साल्ट मिला है। यानी बिना साल्ट मिलाए ही एंटीबायोटिक्स बनाई जा रही थी। कंपनी में काम करते मिले फार्मासिस्ट के हवाले से अफसरों का दावा है कि दवा बनाने के लिए साल्ट का बिल्कुल प्रयोग नहीं किया जा रहा था।
कुछ कंपनियों की एक्सपायर दवा को इसमें मिलाया जाता था, जिससे यह ढाई एमजी साल्ट मिला है। दवा कंपनी और मालिक के खिलाफ पहले से ही रिपोर्ट दर्ज है। इस मामले में कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस संबंध में कंपनी के मालिक राकेश कुमार ढल ने अपना पक्ष रखने से इंकार कर दिया।