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एमडीए ने आधे दामों में बेची करोड़ों की संपत्ति

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मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण में संपत्ति आवंटन में करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। पूरा खेल डिफाल्टर घोषित किए गए आवंटियों के आवंटन निरस्त करने के नाम पर खेल गया। 2016 में जो भूखंड 50 से 55 हजार रुपये वर्ग मीटर की दर से नीलामी में आवंटित हुए थे उन्हें निरस्त करने के बाद अफसरों ने 2018 में 20 से 30 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से खामोशी से बेच डाला। आधे दामों पर संपत्ति बेचे जाने के मामले में वीसी एमडीए अरुण कुमार ने जांच कराने की बात कही है। संपत्ति विभाग के साथ ही कुछ अभियंताओं की भूमिका भी इस खेल में उजागर हो रही है।
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प्राधिकरण ने वर्ष 2016 में वीसी राजेश यादव के समय में बड़े पैमाने पर एमडीए की संपत्तियां बेची थीं। इनमें व्यवसायिक के साथ ही आवासीय भूखंड, फ्लैट और भवन भी शामिल थे। ये सभी संपत्तियां एमडीए ने नीलाम की थीं। नीलामी में शामिल होने वालों से संपत्ति की कुल कीमत की 10 प्रतिशत राशि बतौर पंजीकरण शुल्क जमा कराई गई थी। अधिकतम बोली के आधार पर संपत्तियों को बेचा गया जिससे प्राधिकरण को करोड़ों रुपये का फायदा हुआ था। वर्ष 2018 में इनमें से कई संपत्तियों का आवंटन निरस्त कर दिया गया। बड़े पैमाने पर व्यवसायिक संपत्तियों के आवंटन 2018 में अभियान चलाकर निरस्त किए गए। प्राधिकरण का तर्क था कि जिन आवंटियों के आवंटन निरस्त किए गए हैं उन्होंने पंजीकरण राशि जमा करने के बाद से किश्तें जमा नहीं की हैं। कुछ पर बकाया किश्तों में देरी करने के आरोप थे। यह पहला मौका था जब एमडीए ने 100 से अधिक आवासीय संपत्तियों का आवंटन निरस्त किया था।
अब इन्हीं संपत्तियों को पिछले दरवाजे से आधी दरों पर बेचे जाने का मामला सामने आया है। प्राधिकरण अफसर इस मामले में कठघरे में खड़े हैं। कांशीराम नगर और नया मुरादाबाद की कई ऐसी संपत्तियां हैं जो 2016 में तो 50 से 55 हजार रुपये की दर से बिकीं लेकिन 2018 में इन्हें करीब - करीब आधे दामों पर बेचा गया। कांशीराम नगर में एक भूखंड जो 2016 में 46 हजार रुपये मीटर बिका था उसका आवंटन निरस्त करके एमडीए अधिकारियों ने 2018 में उसे 31 हजार रुपये वर्ग मीटर की दर से बेच दिया। इसी तरह से एक भूखंड को 55 हजार से घटाकर 27 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बेचे जाने का मामला सामने आया है।
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यह गंभीर मामला है हम इसकी जांच कराएंगे। प्राधिकरण की संपत्ति एक बार जिस दर पर बिक चुकी है उसे फिर निरस्त करने के बाद घटी दर पर नहीं बेचा जा सकता है। संपत्ति में कीमतें सिर्फ उन मामलों में घटाई जा सकती हैं जब वह संपत्ति बार - बार विज्ञापन निकालने के बाद भी कभी भी बिकी ही न हो। जो संपत्ति एक बार अधिक दाम पर बिक गई उसे कम दर पर बेचना नियमविरुद्ध है। - अरुण कुमार, वीसी, एमडीए।
पुराने डिफाल्टरों पर कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल
मुरादाबाद। जिन संपत्तियों का आवंटन 2018 में निरस्त किया गया उनमें से तमाम संपत्तियां मौके की थीं, जिन पर लोगों की नजरें लगी थीं। शायद यही वजह है कि इन संपत्तियों का आवंटन किश्त टूटने के कुछ ही समय में निरस्त कर दिया गया। दूसरी तरफ नया मुरादाबाद में सैकड़ों की तादाद में अभी भी ऐसे डिफाल्टर आवंटी हैं जिन्होंने पिछले 15 सालों में भी किश्तें जमा नहीं की हैं। यह भी पहला मौका है जब आवासीय संपत्तियों के आवंटन इतने बड़े स्तर पर निरस्त किए गए। जबकि इससे पहले व्यवसायिक संपत्तियों को निरस्त किया जाता रहा है।
एमडीए ने नहीं लौटाई आवंटियों की रकम
मुरादाबाद। एमडीए ने जिन आवंटियों के आवंटन डिफाल्टर श्रेणी में निरस्त किए उनके द्वारा जमा की गई पंजीकरण राशि जब्त कर ली। यह राशि भी करोड़ों रुपये में है। नियमों की बात करें तो डिफाल्टर होने पर आवंटन निरस्त होने के बाद जमा राशि का 10 प्रतिशत काटकर बाकी रकम आवंटी को वापस की जानी चाहिए। लेकिन एमडीए ने जिन 100 से अधिक संपत्तियों का आवंटन निरस्त किया उनकी पंजीकरण राशि पूरी की पूरी जब्त कर ली।
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