बंदरों से परेशान शहरवासियों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें इनसे निजात मिलने वाली है। नगर निगम प्रशासन ने इसकी सभी तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए मथुरा से एक टीम भी बुला ली गई है। टीम अपनी तैयारी में जुट गई है। निगम अधिकारियों का दावा है कि दो दिन बाद कलक्ट्रेट से इसका अभियान शुरू किया जाएगा।
शहर में बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या से लोग परेशान हैं। बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि वह राह चलते लोगों के हाथों में थमी सब्जी, फल तक को झपट्टा मार छीन ले जाते हैं। घरों की छतों पर सूखने के लिए टंगे कपड़े फाड़ देते हैं तो कभी घर के भीतर रखे खाना और फ्रिज में रखी सब्जी, फल तक चट कर जाते हैं।
बंदरों के आतंक के कारण लोग अपने बच्चों को छतों पर भेजने तक से कतराने लगे हैं। बंदरों के इस आतंक से निजात दिलाने का मामला नगर निगम बोर्ड की बैठक में उठ चुका है। शहर के तमाम लोग भी नगर निगम प्रशासन से समय-समय पर ज्ञापन देकर बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग करते रहे हैं।
जिसे गंभीरता से लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने अब शहर के लोगों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने का बीड़ा उठाया है। टेंडर माध्यम से इसके लिए मथुरा की एक टीम का चयन किया गया है। बंदर पकड़ने में एक्सपर्ट इस टीम के लीडर मोहम्मद इकराम समेत चार सदस्य बृहस्पतिवार देर शाम मुरादाबाद पहुंच गए हैं।
यह टीम नगर निगम के पर्यावरण विशेषज्ञ रामसिंह विष्ट की देखरेख में काम करेगी। अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि टीम दो दिनों तक क्षेत्र में भ्रमण कर बंदरों की मौजूदगी आदि का सर्वे करेगी। इसके बाद अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा। पकड़े गए बंदरों को पड़ोसी जिलों के वन क्षेत्र में वन अधिकारियों से वार्ता कर छोड़ दिया जाएगा।
2011 में पकड़े जा चुके शहर से 4000 बंदर
मथुरा से बंदर पकड़ने के लिए यहां पहुंची टीम के लीडर 60 वर्षीय मोहम्मद इकराम ने बताया कि वह मुरादाबाद में नगर निगम के बुलावे पर 2011 में 4000 बंदर पकड़ जंगल में छोड़ चुके हैं। इसके अलावा वह बरेली, कानपुर, वाराणसी, फिरोजाबाद के अलावा राजस्थान, उत्तराखंड के कई शहरों में भी नगर निगम के बुलावे पर पहुंच बंदरों को पकड़ चुके हैं।