जलियांवाला बाग एक्सप्रेस हादसे के लिए स्टेशन मास्टर को दोषी माना गया है। स्टेशन मास्टर की गलती से हजारों लोग की जान संकट में पड़ गई थी। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया और सभी यात्री सुरक्षित रहे। दुर्घटना की वजह तकनीकी के बजाय मानवीय भूल मानी जा रही है।
शुक्रवार की रात रामगंगा पार कटघर यार्ड में हादसे के बाद शनिवार को ट्रैक क्लीयर कर दिया गया। ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो गई। अधिकारियों ने ट्रैक मरम्मत कराने के साथ ही जांच भी कराई। प्रथमदृष्ट्या इस मामले में स्टेशन मास्टर को दोषी माना गया है।
स्टेशन मास्टर ने ही जल्दबाजी में ट्रेन गुजरने से पहले ही लीवर खींच दिया था। डीआरएम प्रमोद कुमार ने बताया कि दुर्घटना में कहीं कोई तकनीकी खामी सामने नहीं आई है। इस मामले में स्टेशन मास्टर की गलती सामने आई है और उसने लिखित में स्वीकार भी कर लिया है।
कटघर यार्ड में ट्रेन को लूप लाइन में ले जाने के दौरान बनाए गए प्वाइंट को ट्रेन गुजरने के बाद खोला जाना था, लेकिन स्टेशन मास्टर ने ट्रेन गुजरने से पहले ही प्वाइंट के लाक का लीवर खींच दिया। लाक खुलते ही प्वाइंट से ट्रैक पर दो रास्ते बन गए।
एक्सप्रेस के सात कोच गुजरने के बाद तीन कोच नंबर आठ, नौ और दस मुख्य लाइन की ओर जाने लगे और इंजन उन्हें लूप लाइन की ओर ले जा रहा था। जिसके चलते कोच पटरी से उतर गए। उन्होंने बताया कि केबिन की चेकिंग के दौरान वहां लीवर भी उसी स्थिति में मिले और स्टेशन मास्टर ने लिखित में स्वीकार लिया है। थोड़ी सी जल्दबाजी के कारण सैकड़ों लोगों की जान खतरे में डाल दिया।