मुरादाबाद। लाइनपार स्थित मंडी समिति की करीब तीन महीने बाद भी समस्या जस की तस है। न तो नई दुकानों के निर्माण के लिए धन आवंटित हुए और न ही पुरानी दुकानों का मरम्मत हो सका। वहीं बरसात में पुरानी जर्जर दुकानों की छत टपकने लगी है। इससे आढ़तियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
करीब तीन महीने पहले जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर मंडी परिसर से अतिक्रमण हटया था जिसे लेकर दुकानदारों ने विरोध जताया था। दुकानदारों के समर्थन में नगर विधायक रितेश गुप्ता धरने पर बैठ गए थे। इसके बाद मंडी समिति को बेहतर बनाने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट एवं सभापति ने 120 नई दुकानें और करीब 200 पुरानी दुकानों की मरम्मत के प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा। तीन माह गुजर गए लेकिन अभी तक शासन से धन आवंटित नहीं हो सका है।
इस कारण नई दुकानों का प्रस्ताव अधर में लटक गया है। पुरानी दुकानों की मरम्मत न होने से आढ़तियों को परेशानी हो रही है। बारिश के दौरान छत टपकने लगती है। इससे उन्हें आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। जबकि प्रशासन ने भरोसा दिया कि बरसात से पहले धन मिलने पर मरम्मत की जाएगी लेकिन बरसात शुरू होने के बावजूद शासन से धन नहीं मिला। दुकानें जस की तस पड़ी हुई है।
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कारोबारी व किसान दोनों परेशान
- फल सब्जी विक्रेता कल्याण समिति के प्रवक्ता विनोद शर्मा का कहना है कि मंडी की दुकानों से पानी टपक रहा है। कोई पूछने वाला नहीं है। बरसात में किसान और कारोबारी दोनों परेशान हैं। मंडी परिसर 44 एकड़ में फैला है। वर्तमान में मंडी में 218 दुकानें मौजूद हैं लेकिन प्रशासन ने 550 कारोबारियों को लाइसेंस दिया है। अभी 250 दुकानदारों ने अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराया है। शासन और प्रशासन की लापरवाही के चलते कारोबारियों और किसान दोनों परेशान हैं।
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साढ़े चार करोड़ खर्च फिर जलनिकासी नहीं
मंडी उपनिदेशक के निर्देश पर परिसर से जलनिकासी के लिए साढ़े चार करोड़ की लागत से पंप स्थापित किया गया। दावा था कि पंप से मंडी का निर्माण होने से जलनिकासी हो जाएगी लेकिन पंप छोटी नालियों का पानी खींच नहीं सका। पता चला कि मंडी के नाले और छोटी नालियों के बीच कनेक्शन नहीं पाया है। छोटी नालियां नीचे हैं। इस कारण ऊंचाई पर पानी नहीं चढ़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि मंडी प्रशासन साढ़े चार करोड़ खर्च कर दिया लेकिन जलनिकासी की योजना तैयार नहीं की। यह योजना की विफलता है।
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प्रभारी मंत्री तक पहुंची थी मंडी की समस्याएं
व्यापारियों के आंदोलन के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री तक मामला पहुंचा था। प्रभारी मंत्री ने कारोबारियों की समस्याएं सुनने के बाद जिले के अधिकारियों के पक्ष को जाना था। फिर भी कारोबारियों के लिए नई दुकानें नहीं बनाई गई। वहीं पुरानी दुकानों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका।