अब्दुल मन्नान ने किसी भी बॉडी पार्टस पर लोहे की कील का इस्तेमाल नहीं किया बल्कि जीन्स के कपड़े पर शीशम की लकड़ी के टुकड़ों को फेविकोल और एयरालाइट की मदद से चिपाकर अलग-अलग पार्टस बनाए हैं।
दुर्घटना होने पर टुकड़े बिखर न सकें इसलिए उन्हें मजबूती के साथ चिपकाया गया है। लकड़ी पर फायर प्रो मैटीरियल भी लगाया गया है ताकि आग लगने पर ज्यादा नुकसान न हो। इसके बाद लकड़ी पर एपोक्सी, पियू फिनिश का काम किया गया है।
अब्दुल मन्नान ने बताया कि होंडा एक्टीवा के बॉडी पार्टस बनाने का कारण अपनी कला सबको दिखानी थी और यह स्कूटी अपनी पहली कमाई से 2012 में खरीदी थी। इससे कई यादें जुड़ीं हुईं हैं।
अपने समय को व्यर्थ न करें सभी के अंदर कुछ न कुछ करने का टेलेंट है। वक्त का सही जगह इस्तेमाल करें। दोस्त 13 साल पुरानी स्कूटी का मजाक उड़ाते थे। बाजार जाने पर लोग चारों तरफ से घेर लेते हैं और तरह तरह के सवाल करते हैं आखिर लकड़ी से कैसे इसके बॉडी पार्टस बनाएं गए हैं। लोग स्कूटी के साथ फोटो खींचते हैं, तो अच्छा लगता है। आगे कुछ बड़ा करने की जीद है। अब्दुल मन्नान, मुरादाबाद आर्टिस्ट
शहर की सड़कों से सोशल मीडिया पर वायरल
पिछले कुछ दिनों से यह स्कूटी शहर की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया पर वायरल है। शहर की सड़कों पर यह स्कूटी दौड़ रही है और सबका ध्यान अपनी तरफ खींच रही है। यह स्कूटी ओर स्कूटी से अलग है क्योंकि इसके बॉडी पार्टस लकड़ी से बनाए गए हैं। यह सड़कों पर अनोखा नजारा पेश कर रहा है।