मुरादाबाद के गलशहीद मोहल्ले में निर्यातक दंपती ने नाबालिग नौकरानी के साथ मारपीट की। साथ ही नाई को बुलाकर जबरन उसके बाल कटवा दिए। किशोरी की मां की शिकायत पर निर्यातक दंपती और नाई के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, दंपती का कहना है कि किशोरी पढ़ाई न करके मोबाइल और टीवी देखती रहती थी। शामली जिले के कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला ने गलशहीद पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उसकी 15 साल की बेटी है।
एक साल पहले उसने अपनी नाबालिग बेटी को गलशहीद चौराहा प्रिंस रोड निवासी निर्यातक अदनान आलम के घर काम करने के लिए छोड़ दिया था। निर्यातक के घर वह झाड़ू-पोछा का काम करती थी। साथ ही निर्यातक दंपती ने पढ़ाई-लिखाई कराने का भी भरोसा दिया था।
महिला ने बताया कि उसकी बेटी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देती थी। ज्यादातर समय वह टीवी और मोबाइल देखने में व्यस्त रहती थी। आरोप लगाया कि इसी से नाराज होकर शुक्रवार शाम 4:30 बजे अदनान आलम और उनकी पत्नी सबिहा ने किशोरी को डांट-फटकार लगाई और बाद में मारपीट की।
फिर नाई बुलाकर जबरन उसके सिर के बाल भी कटवा दिए। किशोरी ने इसकी सूचना अपनी मां को दी। इसके बाद मां ने 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दे दी। दूसरे दिन पुलिस के साथ निर्यातक के घर पहुंची तो बेटी ने आपबीती सुनाई। बाद मेंं थाने पहुंच कर मां ने तहरीर दी।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर निर्यातक अदनान आलम, उनकी पत्नी सबिहा और बाल काटने वाले नाई नाजिम के खिलाफ केस दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
तीनों आरोपियों का शांतिभंग में चालान
गलशहीद थानाध्यक्ष सौरभ त्यागी ने बताया कि किशोरी से मारपीट की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है। चूंकि अपराध सात साल की कम सजा वाला है। इसी कारण तीनों आरोपियों का शांतिभंग में चालान किया गया है। मुकदमे की विवेचना कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तमाम घरों में काम कर रहे नाबालिग
शहर के करीब एक हजार से अधिक घरों मेंं नौकर रहते हैं। इसमें नाबालिग भी शामिल हैं, जो मालिक के घर रहकर चौका-बर्तन, झाड़ू-पोछा आदि का काम करते हैं। ये नौकर आसपास के जिले के अलावा उत्तराखंड के हैं। उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है, लेकिन अधिकतर मामले पुलिस तक नहीं पहुंचते।
अमानवीय व्यवहार के लिए तीन से सात साल तक की सजा
बालश्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के मुताबिक 14 साल से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना अवैध है। ऐसा करने पर छह महीने से दो साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार के शोषण या अमानवीय व्यवहार के लिए कठोर सजा का प्रावधान है। इसमें तीन से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।