जीर्णोद्धार के लिए बंद है पुस्तकालय
पुस्तकालय की देखरेख करने वाले आशुतोष खन्ना (प्रभारी सचिव) ने बताया कि अपने स्तर से जीर्णोद्धार करवाया है। जर्जर स्थिति में होने की वजह से बारिश के मौसम में छत टपक रही थी। यह सही करवाई है। इसके अलावा पेंट करवाया है। इस स्थिति में है कि वहां पर बैठक अध्ययन किया जा सकता है, लेकिन अभी बिजली की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में वहां बैठना मुश्किल है। बिजली विभाग में आवेदन कर दिया है। फाइल भी बन गई है। सिर्फ मीटर लगने का काम रह गया है।
बग्घी से पहुंचे थे गांधी जी
बाजार में नहीं थी पैर रखने की जगह पहले मंडी बांस और वर्तमान में दीन दयाल नगर निवासी महेंद्र कुमार ने बताया कि गांधी जी पान का दरीबा के पास साहू रघुवीर सरन खत्री के घर रुके थे और उन्हीं की बग्घी में सवार होकर ब्रजरतन पुस्तकालय के उद्घाटन में आए थे। मेरे पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मास्टर रामकुमार की ब्रज रतन पुस्तकालय के पास दुकान किताबों की थी। उनकी बग्घी रोककर टीका दिया था। उस वक्त 11 सौ रुपये दान दिए थे। पूरे बाजार में पैर रखने के लिए जगह नहीं थी। वह दिव्य पुरुष थे। पिता जी महात्मा गांधी के अलावा पंडित गोविंद बल्लभ पंत आदि के साथ रहे। वह ताउम्र कांग्रेस पार्टी के जिला कोषाध्यक्ष रहे। महात्मा गांधी के आह्वान पर नमक आंदोलन गिरफ्तारियां दीं और स्वदेशी आंदोलन को सफल बनाने के लिए विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी।