फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gandhi Jayanti: नमक सत्याग्रह के लिए महात्मा गांधी ने बृजरत्न हिंदू पुस्तकालय में किया था मंथन

Sun, 02 Oct 2022 01:14 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

महात्मा गांधी ने 12 अक्तूबर 1929 (विजय दशमी संवत 1986) को पुस्तकालय के नए भवन का उद्घाटन किया था। मुरली मनोहर को इसका प्रधान और लक्ष्मीनारायण को मंत्री बनाया गया था। लक्ष्मीनारायण खन्ना इस पुस्तकालय के निर्माण निरीक्षक थे।
विज्ञापन
बृजरत्न हिंदू पुस्तकालय - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश की आजादी में मुरादाबाद की धरती का प्रमुख योगदान है। यही वजह है कि महात्मा गांधी का मुरादाबाद से खास लगाव था। इसकी मिसाल है अमरोहा गेट स्थित बृजरत्न पुस्तकालय। महात्मा गांधी ने पुस्तकालय के नए भवन का उद्घाटन किया था। स्वतंत्रता संग्राम का गवाह रहे इस पुस्तकालय में नमक सत्याग्रह के लिए मंथन हुआ था।

विज्ञापन


मुरादाबाद का नाम लिए बिना आजादी का इतिहास अधूरा है। इसके महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महात्मा गांधी ने आंदोलन शुरू करने के अलावा यहां बृजरत्न हिंदू पुस्तकालय की स्थापना की थी। महात्मा गांधी ने 12 अक्तूबर 1929 (विजय दशमी संवत 1986) को पुस्तकालय के नए भवन का उद्घाटन किया था। मुरली मनोहर को इसका प्रधान और लक्ष्मीनारायण को मंत्री बनाया गया था। लक्ष्मीनारायण खन्ना इस पुस्तकालय के निर्माण निरीक्षक थे। यहीं पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नमक सत्याग्रह शुरू करने पर मंथन हुआ था। इसके बाद वर्ष 1930 में भारी भीड़ उमड़ी थी।

असहयोग आंदोलन के वक्त महसूस हुई थी जरूरत
सितंबर 1920 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। अंग्रेजों का विरोध करने के लिए असहयोग प्रस्ताव पारित हुआ था। इसमें शामिल होने के लिए महात्मा गांधी, पंडित मदनमोहन मालवीय, पंडित मोतीलाल नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना मोहम्मद अली आदि सेनानी आए थे। महात्मा गांधी का यह मुरादाबाद में यह पहला आगमन था। इसलिए माना जाता है कि असहयोग आंदोलन की नींव पड़ने के साथ ही बैठकों के लिए एक स्थान की आवश्यकता महसूस हुई, जो बाद में बृजरत्न हिंदू पुस्तकालय के रूप में पूरी हुई।

विज्ञापन
विज्ञापन

जीर्णोद्धार के लिए बंद है पुस्तकालय
पुस्तकालय की देखरेख करने वाले आशुतोष खन्ना (प्रभारी सचिव) ने बताया कि अपने स्तर से जीर्णोद्धार करवाया है। जर्जर स्थिति में होने की वजह से बारिश के मौसम में छत टपक रही थी। यह सही करवाई है। इसके अलावा पेंट करवाया है। इस स्थिति में है कि वहां पर बैठक अध्ययन किया जा सकता है, लेकिन अभी बिजली की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में वहां बैठना मुश्किल है। बिजली विभाग में आवेदन कर दिया है। फाइल भी बन गई है। सिर्फ मीटर लगने का काम रह गया है।

बग्घी से पहुंचे थे गांधी जी
बाजार में नहीं थी पैर रखने की जगह पहले मंडी बांस और वर्तमान में दीन दयाल नगर निवासी महेंद्र कुमार ने बताया कि गांधी जी पान का दरीबा के पास साहू रघुवीर सरन खत्री के घर रुके थे और उन्हीं की बग्घी में सवार होकर ब्रजरतन पुस्तकालय के उद्घाटन में आए थे। मेरे पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मास्टर रामकुमार की ब्रज रतन पुस्तकालय के पास दुकान किताबों की थी। उनकी बग्घी रोककर टीका दिया था। उस वक्त 11 सौ रुपये दान दिए थे। पूरे बाजार में पैर रखने के लिए जगह नहीं थी। वह दिव्य पुरुष थे। पिता जी महात्मा गांधी के अलावा पंडित गोविंद बल्लभ पंत आदि के साथ रहे। वह ताउम्र कांग्रेस पार्टी के जिला कोषाध्यक्ष रहे। महात्मा गांधी के आह्वान पर नमक आंदोलन गिरफ्तारियां दीं और स्वदेशी आंदोलन को सफल बनाने के लिए विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें