लालबाग काली माता मंदिर की गद्दी को लेकर विवाद
- फोटो : संवाद
जहां श्री काली माता मंदिर पर बैठक आयोजित की गई। बताया जाता है कि बैठक में महंत राम गिरि और महंत सज्जन गिरि के बीच पूर्व के विवाद पर सुनवाई हुई। बाद में महंत राम गिरि द्वारा महंत नारायण गिरि की प्रेरणा से संकलित कर बनाई गई पुस्तक मठ माहात्म्य का विमोचन किया गया।
इसके बाद दाेपहर में जूना अखाड़ा के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि साधु-संतों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने डीएम से मुलाकात की। वापस जाते समय उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि काली माता मंदिर के महंत सज्जन गिरि और प्राचीन सिद्धपीठ मंदिर के महंत राम गिरि को महंत पद से हटा दिया गया है।
लालबाग काली माता मंदिर की गद्दी को लेकर विवाद
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इस संबंध में जिला प्रशासन को अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों महंतों का स्थानांतरण किया जाएगा। दो से चार दिन में एक्शन लेने वाले हैं। यहां महंतों के पदों पर नई व्यवस्था बनाई जाएगी। यहां नई नियुक्ति की जाएगी, जबकि इन दोनों को इससे बड़े मठों की जिम्मेदारी देंगे।
कहा कि पहले माैखिक रूप से बात की गई है। बाद में लिखित रूप से सूचना दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दोनों में विवाद था। लोगों की ओर से भी शिकायत थी। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद निर्णय लिया गया है। इसके बाद महंत नारायण गिरि चले गए।
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महंतगण बोले, मंदिर की गुरु परंपरा में दखल देने का बाहरी व्यक्ति को नहीं अधिकार
मुरादाबाद। महंत सज्जन गिरि और महंत राम गिरि ने बुधवार शाम संयुक्त प्रेसवार्ता कर जूना अखाड़ा के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि के इस कदम को चुनौती दे डाली। कहा कि बुधवार को कुछ स्वार्थी, धनलोभी व सनातन धर्म के विरोधी लोगों की भ्रामक सूचना व फर्जी शिकायतों पर बुधवार को महंत नारायण गिरि प्रवक्ता श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा और सेक्रटरी महंत कंचन गिरि अपने साथ कुछ अन्य साधु-संतों को लेकर मंदिर में पूजा अर्चना की बात कहकर चले आए।
मंदिर में बैठक कर दोनों महंतों को बुलाकर जानकारी करने लगे। जिस पर दाेनों महंतों ने साधु-संतों को बताया कि उन्हें गलत जानकारी दी गई है। दोनों के बीच अब कोई विवाद नहीं है। दोनों महंत मंदिर के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। दोनों ने आरोप लगाया कि उनसे धनराशि की मांग की गई। कहा गया कि यदि मांगी गई धनराशि नहीं दोगे तो महंत पद से हटा देंगे।
जबकि मंदिर की गुरु परंपरा में दखल देने का अधिकार किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं है। धनराशि देने से मना करने पर यह लोग बिना किसी से बात किए और बिना जानकारी दिए मंदिर से चले गए। कहा कि गलत तरीके से बिना कोई नोटिस और पूर्व सूचना के प्रशासन व पुलिस को महंतों को हटाए जाने की मिथ्या जानकारी दी गई है, जिसका कोई प्रभाव नहीं है। उनका यह कार्य विधि विरुद्ध है।