मुरादाबाद। कौमार्य प्रमाणपत्र मांगकर विवादों से घिरे मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात की विदेशी फंडिंग की जांच शुरू हो गई है। अभी तक की जांच में मदरसा प्रबंधन को एक साल में पेटीएम के जरिये फंडिंग मिलने की बात सामने की है। इस मामले में टीम बैंकों के माध्यम से खातों के लेनदेन का पुराना रिकार्ड भी खंगाला जाएगा। जांच कमेटी में एलडीएम को भी शामिल किया गया है। डीएम अनुज सिंह मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात के मामले में विदेशी फंडिंग की जांच के लिए एडीएम प्रशासन गुलाब चंद्र के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की है। इस कमेटी में मुख्य कोषाधिकारी रेनू बौद्ध के अलावा एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह शामिल हैं। मंगलवार को टीम में शामिल अधिकारी लोधीपुर स्थित मदरसा पहुंचे। जहां प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ की। जांच से पता चला कि मदरसा ने एक साल के दौरान पेटीएम या मोबाइल के माध्यम से फंडिंग लिया है। डीएम अनुज सिंह ने बताया कि टीम में एलडीएम को भी शामिल किया गया है। एडीएम प्रशासन गुलाब चंद्र का तबादला होने पर शासन ने नई अधिकारी की तैनाती कर दी है। इस कारण जांच पर असर नहीं पड़ेगा। पुराने रिकार्डों को खंगालने के लिए बैंकों का सहयोग लिया जाएगा। इस जांच से स्पष्ट होगा कि मदरसे को कहां-कहां से फंडिंग मिली है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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एसडीएम ने डीएम को सौंपी रिपोर्ट
- 13 वर्षीय छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगने के मामले में एसडीएम सदर डॉ. राममोहन मीणा ने अपनी जांच पूरी कर ली है। उन्होंने मदरसे से जुड़ी अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। एसडीएम और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मदरसे के रिकार्डों की जांच की थी।