अमित मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। बैंकों का रद्दी एटीएम को कबाड़ में बेचना खतरनाक हो सकता है। दसवीं पास राहिल ने कबाड़ में खरीदी गई एटीएम से ही उसे काटने और आसानी से पैसे उड़ाने का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद राहिल और उसके साथियों ने मुरादाबाद में एटीएम काटकर 16 लाख 74 हजार रुपये उड़ा दिए। केवल राहिल ही नहीं पकड़े गए उसके 4 साथी और मेवात तक फैले कम पढ़े लिखे सदस्यों के इन गिरोहों ने एटीएम मशीनों की कमजोरी ढूंढ निकाली है। इन मशीनों पर ऐसी जगह कट लगाकर गैस कटर का प्रयोग करते हैं नोटों से भरी पूरी ट्रे इस हिस्से के कटते ही बाहर आ जाती है। आईजी रमित शर्मा ने पकड़े गए आरोपियों को एक एटीएम मशीन में ले जाकर क्राइम सीन कराया तो उनकी इस काम में महारत देखकर सभी अधिकारी दंग रह गए।
मुरादाबाद में एटीएम काटकर हुई 1674000 रुपये की लूट तथा संभल में एटीएम काटकर उड़ाए गए 1000000 रुपये की चोरी के मामले में पुलिस ने खुलासा कर दिया है। चार सदस्य गिरफ्तार किए गए। अहम सवाल यह है कि हाई-फाई और हाई टेक्नोलॉजी से लैस एटीएम मशीनों को ये शातिर कैसे 20 से 30 मिनट के भीतर काट डालते हैं। इसके लिए पकड़े गए आरोपियों को लेकर खुद आईजी रमित शर्मा एक एटीएम में गए और बदमाशों से पूछा कि वह कैसे इन घटनाओं को अंजाम देते हैं। खास तौर पर मुरादाबाद में एटीएम काटने वाले राहिल ने ठीक उसी अंदाज में उपकरणों के साथ एक एटीएम में दिखाया कि कैसे बेखौफ होकर वे अपने काम को अंजाम देते हैं। अधिकारी भी यह देखकर हतप्रभ रह गए कि मात्र दसवीं पास लुटेरों ने कैसे इन मशीनों पर काबू पाने का तरीका ढूंढ लिया है। यहां राहिल ने स्पष्ट कर दिया किस तरह उसने एटीएम को चुटकियों में चटका डाला। कैसे एटीएम का एक हिस्सा कट जाता है और नोटों से भरी ट्रे धीरे से बाहर निकाल ली जाती है। गैंग के सदस्यों ने बताया कि पुराने हो चले एटीएम मशीनों को बैंक स्क्रैप में बेच देते हैं। कबाड़ियों से इन्हें इन गैंग के सदस्य खरीद लेते हैं और फिर उन पर प्रैक्टिस करते हैं। इसके बाद फिर और मोटी चादरों को गैस कटर से काटकर टाइम मैनेजमेंट सीखा जाता है कितनी देर में एक एटीएम काटा जा सकता है। अहम बात यह है की बदमाश सीधे देसी तरीकों पर काम करते हैं और ज्यादा तकनीक के चक्कर में नहीं पड़ते। इन सीधे देशी तरीकों से ही वह हाई-फाई पुलिस और हाईटेक सिक्योरिटी सिस्टम को भेद रहे हैं।
एटीएम में ऐसे लगाते थे रुपयों का पता
पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि उनके पास कोई ऐसी एडवांस डिवाइस नहीं है जो यह पता लगा सके कि एटीएम मशीन में कितने नोट हैं। इसका सीधा तरीका है एक बदमाश गेट पर खड़ा होकर यह रेकी कर लेता है कि लोग उसमें दो 2000 के नोट गिन रहे हैं या 500-500 के। यदि देखा कि व्यक्ति 2000 के नोट गिनते हुए निकल रहे हैं तो इससे पता लग जाता है कि मशीन में ज्यादा पैसे हैं। यदि पांच सौ का नोट मशीन दे रही है तो पता लग जाता है कि मशीन में कम नोट हैं। बदमाश ज्यादा नोट वाले एटीएम को ही काटते हैं।
जहां मेन डोर पर सेंसर, वहां नहीं घुसते
कई कंपनियों के एटीएम रूम के मेन डोर पर ही एक सेंसर लगा होता है। यह सेंसर इतना प्रभावी है कि यदि इसका वायर भी काट दिया जाए तो भी यह अलार्म देता है। जबकि सीसीटीवी कैमरा पेंट स्प्रे डलते ही बेकार हो जाता है। बदमाश यह चेक कर लेते हैं की एटीएम के मेन डोर पर सेंसर तो नहीं लगा। बहुत से एटीएम अभी ऐसे हैं जिन पर सेंसर नहीं लगा है। बदमाश उन्हीं को अपना निशाना बना रहे हैं। संभल और मुरादाबाद में जो दोनों एटीएम काटे गए उनमें भी सेंसर नहीं लगे थे।
डिजाइन के अलावा कबाड़ में एटीएम बेचने पर भी बैंकों को करना होगा विचार
डीआईजी रमित शर्मा ने एटीएम की डिजाइन को लेकर बैंकों को मंथन करने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि वह बैंक अफसरों को इससे अवगत भी कराएंगे। इसके साथ ही राहिल और उससे गैंग के खुलासे ने बैंकों के एटीएम को कबाड़ में बेचने के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। अगर कबाड़ में बेची एटीएम से एटीएम लुटेरे प्रशिक्षण लेते हैं तो इससे एटीएम की सुरक्षा हमेशा खतरे में रहेगी।
दूर तक फैला है जाल
संभल और मुरादाबाद की इन दो घटनाओं में पुलिस टीमों ने राजस्थान तक काम किया है। आईजी रमित शर्मा के मुताबिक एटीएम काटने वाले दर्जनों गैंग वहां से यहां तक काम कर रहे हैं। मेवात नूह आदि क्षेत्रों में काफी सक्रिय हैं और वहीं से यहां तक पूरा रैकेट ऑपरेट करते हैं। दिल्ली में कई जगह के लिए ट्रेनिंग भी लेते हैं। इस घटना में भी यह सामने आया की तिहाड़ जेल में ही इस गैंग के दो शातिर बदमाशों की दोस्ती हुई और संभल के आसिफ में फिर पूरे गैंग को इकट्ठा करके यह प्लानिंग बनाई।
वर्जन
एटीएम के डिजाइन को लेकर एक बार फिर से मंथन करने की जरूरत है। इस बाबत मैं आला अधिकारियों को भी अवगत कराऊंगा कि कैसे कम पढ़े लिखे बदमाश हाईटेक इंजीनियरों द्वारा डिजाइन की गई इस मशीन को काट डालते हैं। वह भी बहुत थोड़े समय में। यह चिंता की बात है।
- रमित शर्मा आईजी मुरादाबाद।