दिल्ली के व्यापारी से लूट में रंगे हाथ दबोचे गए कोतवाली के दो सिपाहियों को पुलिस अफसरों ने बेगुनाह बताकर जेल से छुड़ा लिया है। घटना के बाद दोनों सिपाहियों की वीडियो भी वायरल हुई थी। जिसके बाद दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया गया था।
दोनों के पास से लूटी गई रकम भी बरामद हो गई थी। लेकिन पुलिस अफसरों को सिपाहियों की गर्दन बचानी थी लिहाजा सारे सुबूत दफन कर दिए गए। पुलिस ने कोर्ट में 169 सीआरपीसी की रिपोर्ट देकर कहा है कि सिपाही बेकसूर हैं। जिसके बाद अदालत ने दोनों की रिहाई का आदेश दे दिया है।
लूट की यह वारदात 14 जनवरी को तड़के करीब चार बजे कोतवाली क्षेत्र में कुइयां वाली मस्जिद के पास हुई थी। दिल्ली में शाहदरा निवासी ब्रास स्क्रैप व्यापारी विवेक शर्मा पुत्र किशनदास शर्मा मुरादाबाद के व्यापारियों को माल सप्लाई करते हैं। घटना के वक्त वह बड़ा शाहशफा निवासी एक व्यापारी से एक लाख रुपये का पेमेंट लेकर रेलवे स्टेशन जा रहे थे।
तभी कुइयां वाली मस्जिद के पास लैपर्ड सवार सिपाहियों जयप्रकाश उर्फ जेपी और मोतीलाल ने विवेक को रोक लिया और चेकिंग के नाम पर उनकी जेेब से एक लाख रुपये जबरन निकाल लिए। बाद में 53 हजार रुपये लौटा दिए।
विरोध करने पर दोनों सिपाहियों ने स्क्रैप व्यापारी को पिस्टल सटाकर जान से मारने की धमकी दी। रकम लूटने के बाद सिपाहियों ने विवेक शर्मा को रोडवेज स्टेशन ले जाकर दिल्ली की बस में बैठा दिया था। सिपाहियों ने उन्हें हिदायत दी कि यदि घटना की बाबत मुूंह खोला तो जान से मार देंगे।
घटना का वीडियो वायरल हो गया था और इसके बाद सिपाहियों ने व्यापारी के पैर पकड़कर माफी मांगी थी। ये माफी मांगने वाला वीडियो भी वायरल हुआ था। अब इस मामले में विवेचक महिपाल सिंह ने 15 मार्च को (भाजपा के जीतने के बाद) खामोशी के साथ फाइनल रिपोर्ट लगा दी है।
घटना के बाद से ही जेल में बंद दोनों सिपाहियों को छुड़ाने के लिए एसएसआई महिपाल सिंह ने कोर्ट में 169 सीआरपीसी की रिपोर्ट दाखिल कर दी है। जिस पर सीओ समेत तमाम अफसरों की संस्तुति है।
पुलिस ने दावा किया है कि दोनों सिपाहियाें के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला, लिहाजा दोनों को छोड़ दिया जाए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों सिपाहियों को रिहा करने के आदेश दिए हैं।