रुचि वीरा के बाहरी होने का फायदा, मुस्लिम मतों में बंटवारे की उम्मीद
रुचि वीरा मूलरूप से बिजनौर जिले की रहने वाली हैं। इससे पहले वह मुरादाबाद से कोई चुनाव नहीं लड़ीं हैं और न ही उनका मुरादाबाद की सियासत में कोई दखल रहा है। उनके बाहरी होने का भाजपा को चुनाव मेंं फायदा हो सकता है। इसके अलावा सांसद डॉ. एसटी हसन का टिकट कटने से पनप रही नाराजगी और बसपा से मुस्लिम उम्मीदवार होने से मुस्लिम मतों में बंटवारे की उम्मीद जताई जा रही है। इसका भी भाजपा को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
वैश्य मतदाताओं में लगा सकती हैं सेंध चुनाव हिंदू-मुस्लिम नहीं होने की उम्मीद
मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र में करीब एक लाख वैश्य मतदाता हैं, जो भाजपा के वोटर माने जाते रहे हैं। सपा ने डॉ. एसटी हसन का टिकट काटकर पूर्व विधायक रुचि वीरा पर दांव लगाया है। जो वैश्य समुदाय से ही ताल्लुक रखतीं हैं। सपा रुचि वीरा के सहारे वैश्य मतदाताओं में सेंधमारी कर सकती है। दूसरी ओर रुचि वीरा के आने से चुनाव सीधे तौर पर हिंदू मुस्लिम नहीं होने की उम्मीद है। इसका भी सपा को फायदा मिल सकता है।
दलित-मुस्लिम समीकरण के साथ नाराजगी भुनाने का मौका
बसपा ने मुरादाबाद सीट से इरफान सैफी को उम्मीदवार बनाकर दलित-मुस्लिम समीकरण को साधने की पूरी कोशिश की है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभी तक 18 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। सपा से डॉ. एसटी हसन का टिकट कटने के बाद प्रमुख दलों से अब बसपा से ही मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में है। बसपा को इसका फायदा हो सकता है। इसके अलावा डॉ. एसटी हसन को प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से मुस्लिमों में पनप रही नाराजगी को भुनाने का बसपा के पास मौका है।