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सियासत: सपा प्रत्याशी बदलते ही बदल गए दलों के चुनावी समीकरण, जानें भाजपा और बसपा को क्या नफा और क्या नुकसान?

Thu, 28 Mar 2024 03:49 PM IST
शाहरुख खान मोहम्मद सलाम खां, अमर उजाला, मुरादाबाद

सार

समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बदलते ही दलों के चुनावी समीकरण बदल गए हैं। मुरादाबाद की सियासत में रुचि वीरा की एंट्री से उथल-पुथल मच गई है। सपा प्रत्याशी बदलने से भाजपा और बसपा में नफा-नुकसान का आकलन शुरू हो गया है।
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मुरादाबाद में सपा ने दिया रुचिवीरा को टिकट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुरादाबाद की सियासत में बिजनौर की पूर्व विधायक रुचि वीरा की एंट्री होने से उथल-पुथल मच गई है। सपा प्रत्याशी बदलते ही दूसरे राजनीतिक दलों के समीकरण बदल गए। प्रमुख दल भाजपा और बसपा बदले समीकरण के हिसाब से रणनीति बनाने में जुट गई है। वहीं प्रत्याशी बदलने से सपा के सामने अपने परंपरागत वोट बैंक को बचाए रखने की भी चुनौती होगी। 
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वैसे तो सीधे तौर पर सपा प्रत्याशी के रूप में रुचि वीरा के नामांकन के साथ बुधवार को उनकी मुरादाबाद की राजनीति में एंट्री हुई। लेकिन पर्दे के पीछे की शुरुआत करीब पंद्रह दिन पूर्व हुई थी। बताया जाता है कि आजम खां की करीबी रुचि वीरा को सीतापुर से जेल से मुरादाबाद से चुनाव की तैयारी करने का संदेश मिला था। 

इसके बाद पूर्व विधायक रुचि वीरा ने मुरादाबाद के सपा नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया था। चुनाव लड़ने पर सलाह मशविरा भी लिया। लेकिन ऐन वक्त पर टिकट सांसद डॉ. एसटी हसन को मिल गया। मंगलवार को एक ओर डॉ. एसटी हसन ने नामांकन किया तो दूसरी ओर उनके टिकट कटने की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। 
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बुधवार को रुचि वीरा के नामांंकन के साथ चर्चाओं पर विराम लग गया। अब रुचि वीरा के चुनाव मैदान में आने से सियासी समीकरण भी बदल गए हैं। इसका असर सपा के साथ-साथ भाजपा और बसपा पर भी पड़ेगा। नफा नुकसान को देखते हुए राजनीतिक दल चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। 

 

रुचि वीरा के बाहरी होने का फायदा, मुस्लिम मतों में बंटवारे की उम्मीद 
रुचि वीरा मूलरूप से बिजनौर जिले की रहने वाली हैं। इससे पहले वह मुरादाबाद से कोई चुनाव नहीं लड़ीं हैं और न ही उनका मुरादाबाद की सियासत में कोई दखल रहा है। उनके बाहरी होने का भाजपा को चुनाव मेंं फायदा हो सकता है। इसके अलावा सांसद डॉ. एसटी हसन का टिकट कटने से पनप रही नाराजगी और बसपा से मुस्लिम उम्मीदवार होने से मुस्लिम मतों में बंटवारे की उम्मीद जताई जा रही है। इसका भी भाजपा को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
 

वैश्य मतदाताओं में लगा सकती हैं सेंध चुनाव हिंदू-मुस्लिम नहीं होने की उम्मीद
मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र में करीब एक लाख वैश्य मतदाता हैं, जो भाजपा के वोटर माने जाते रहे हैं। सपा ने डॉ. एसटी हसन का टिकट काटकर पूर्व विधायक रुचि वीरा पर दांव लगाया है। जो वैश्य समुदाय से ही ताल्लुक रखतीं हैं। सपा रुचि वीरा के सहारे वैश्य मतदाताओं में सेंधमारी कर सकती है। दूसरी ओर रुचि वीरा के आने से चुनाव सीधे तौर पर हिंदू मुस्लिम नहीं होने की उम्मीद है। इसका भी सपा को फायदा मिल सकता है।
 
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दलित-मुस्लिम समीकरण के साथ नाराजगी भुनाने का मौका
बसपा ने मुरादाबाद सीट से इरफान सैफी को उम्मीदवार बनाकर दलित-मुस्लिम समीकरण को साधने की पूरी कोशिश की है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभी तक 18 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। सपा से डॉ. एसटी हसन का टिकट कटने के बाद प्रमुख दलों से अब बसपा से ही मुस्लिम प्रत्याशी  मैदान में है। बसपा को इसका फायदा हो सकता है। इसके अलावा डॉ. एसटी हसन को प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से मुस्लिमों में पनप रही नाराजगी को भुनाने का बसपा के पास मौका है।
 
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