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पीतल नगरी में कोई रंग चढ़ाना आसान नहीं, भाजपा के सर्वेश और सपा के डॉ. हसन में सीधा मुकाबला

Sun, 21 Apr 2019 02:44 AM IST
Vikas Kumar उमेश शर्मा, अमर उजाला, मुरादाबाद
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भाजपा और सपा - फोटो : फाइल फोटो
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पूरी दुनिया में अपने पीतल की चमक बिखेर रही पीतल नगरी पर इस बार किसका रंग चढ़ेगा, यह तस्वीर अभी साफ नहीं है। अलबत्ता इतना तय है कि लोकसभा के चुनावों में आजादी के बाद से हर दल को आजमा चुकी पीतल की नगरी में मुकाबला काफी रोमांचक होने जा रहा है। मतदान में अब सिर्फ चार दिन बाकी हैं। मुख्य टक्कर भाजपा के कुंवर सर्वेश सिंह और गठबंधन से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. एसटी हसन के बीच मानी जा रही है। सर्वेश मौजूदा सांसद हैं और डॉ. हसन को 2014 में करीब 87 हजार वोटों से शिकस्त दे चुके हैं। दोनों की अपनी ताकत और कमजोरियां हैं। पांच बार ठाकुरद्वारा से विधायक और मौजूदा सांसद सर्वेश के पास लंबा सियासी अनुभव है। ठाकुरद्वारा और बढ़ापुर विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं पर भी अच्छी पकड़ रही है। लेकिन मुस्लिम मतों का सपा की तरफ झुकाव उन्हें मुश्किल में डाल सकता है। अनुसूचित जाति के 1.8 लाख मतदाताओं को साधना भी बड़ी चुनौती है। यदि मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण सपा की तरफ हुआ और बसपा के  वोट ट्रांसफर हो गए तो सर्वेश के लिए सीट बचा पाना मुश्किल होगा। 

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दूरी बनाकर चल रहे बसपा कार्यकर्ताः दूसरी ओर पेशे से चिकित्सक डॉ. एसटी हसन मुरादाबाद के मेयर रह चुके हैं। बेदाग छवि और सरल स्वभाव के साथ ही बसपा का गठबंधन उनकी ताकत बन सकता है। सपा के ही टिकट पर 2014 में उन्हें 3,97,720 वोट मिले थे। तब बसपा प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी ने 1,60,945 वोट हासिल किए थे। डॉ. हसन को यकीन है कि गठबंधन की वजह से बसपा के वोट इस बार उन्हें मिलेंगे। 8.8 लाख मुस्लिम और 1.8 लाख अनुसूचित जाति के मतदाताओं को अपनी ताकत मान रहे हसन की सबसे बड़ी चुनौती बसपा के वोटरों को साधना है। बसपा का परंपरागत वोटर अभी तक इस सीट पर सपा से दूरी बनाए है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की जनसभा से भी बसपा कार्यकर्ताओं ने जिस तरह दूरी बनाई वह डॉ. हसन के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। मुरादाबाद के मंच से जय भीम का नारा देकर मोदी भाजपाइयों को बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी का सूत्र भी दे गए हैं। 

कुछ खास तथ्य
1952 में मुरादाबाद नाम से दो लोकसभा सीट थीं। एक मुरादाबाद और दूसरी मुरादाबाद पश्चिम। 1957 में मुरादाबाद पश्चिम को अमरोहा संसदीय क्षेत्र नाम दिया गया।
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1957 में प्रोफेसर राम शरण सिर्फ 6356 वोट से जीते थे।
इस सीट पर कांग्रेस चार बार जीत चुकी है, तीन बार सपा और दो बार भारतीय जनसंघ की जीत को जोड़ें तो भाजपा भी तीन बार जीत दर्ज करा चुकी है। 1962 में सैय्यद मुजफ्फर हुसैन के रूप में निर्दलीय को सिर्फ एक बार ही यहां से जीत मिली है।
गुलाम मोहम्मद मुरादाबाद से चार बार सांसद रहे। समाजवादी पार्टी के डॉ. शफीकुर्रमान बर्क ने हैट्रिक लगाई थी। 

ये करेंगे फैसला
19.41 लाख वोटर
10.67 लाख पुरुष वोटर
8.74 लाख महिला वोटर

जातीय गणित
मुस्लिम     8.80 लाख
जाटव     1.80 लाख 
वाल्मीकि     43,000 हजार
यादव    29,000 हजार
ठाकुर    1.50 लाख 
सैनी     1.49 लाख 
ब्राह्मण    45,000 हजार

मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें मुरादाबाद नगर, देहात, कांठ, ठाकुरद्वारा और बढ़ापुर शामिल है।


मुस्लिमों वोटरों में पैठ बना रहे कांग्रेस के इमरान
कांग्रेस प्रत्याशी और नामी शायर इमरान प्रतापगढ़ी की रफ्तार भी इस सीट के परिणामों में उलटफेर कर सकती है। बेदाग छवि और मोदी पर सीधा निशाना उनकी ताकत है। मुस्लिम मतों को अपनी ओर मोड़ने की कोशिश भी है। लेकिन कांग्रेस के एक धड़े का विरोध और बूथ स्तर पर लड़खड़ाता संगठन बड़ी कमजोरी है। कांग्रेस का कोई स्टार प्रचारक माहौल बनाने नहीं पहुंचा है। प्रियंका व राहुल गांधी के रोड शो के दावे तो कांग्रेसी कर रहे हैं लेकिन अभी तक उनका कोई कार्यक्रम नहीं आया है।
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2014 में किसे कितने      मत मिले
सर्वेश सिंह (भाजपा)        4,85,224
डा. एसटी हसन (सपा)     3,97,720
याकूब कुरैशी (बसपा)      1,60,945
नूरबानो (कांग्रेस)           19,732


1996 से अब तक के सांसद
वर्ष          सांसद                            पार्टी

1996    शफीकुर्रहमान बर्क              सपा
1998    शफीकुर्रहमान बर्क              सपा
1999     चंद्र विजय सिंह                अभालोकां
2004    शफीकुर्रहमान बर्क              सपा
2009     मोहम्मद अजहरुद्दीन         कांग्रेस
2014      कुंवर सर्वेश कुमार सिंह      भाजपा



 

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