मुरादाबाद। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय द्वारा करीब दो माह के इंतजार के बाद विद्यार्थियों को एलएलबी का परिणाम दिया। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं जो पांचों पेपरों में फेल हैं। कॉलेज संचालकों ने दावा किया कि सिर्फ ढाई फीसदी परिणाम रहा है।
मुरादाबाद मंडल में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से लॉ पाठ्यक्रम के 34 कॉलेज संबद्ध हैं। स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सभी कॉलेजों में लगभग पांच हजार विद्यार्थी एलएलबी में और पांच हजार विद्यार्थी बीए एलएलबी में हैं। सचिव अशोक यादव ने बताया कि लगभग सभी विद्यार्थी फेल हैं। विद्यार्थी कह रहे हैं कि जब ऐसा परिणाम देना था तो दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा क्यों करवाई गई। हमने उन्हें यही कहा कि यह परिणाम हमने नहीं दिया है। पहले सेमेस्टर में सभी पेपर में फेल होने के बाद भी विद्यार्थियों को दूसरे सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया जाएगा। अब तीसरे सेमेस्टर के साथ उन्हें पहले सेमेस्टर के सभी पेपर देने होंगे। चौथे सेमेस्टर तक सभी पेपर में उत्तीर्ण होना होगा। हमारे 20 वर्ष के कार्यकाल में हमारे सामने यह परिस्थिति पहली बार आई है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है। विभिन्न मुद्दों को लेकर हम राज्यपाल से भी मिले थे। उन्होंने जांच का आश्वासन दिया था। इस संबंध में सोमवार को वार्ता की जाएगी। साथ ही एलएलबी के सभी कॉलेजों की सोमवार को आपात बैठक भी बुलाई जाएगी। दूसरे सेमेस्टर के परिणाम और प्रयोगात्मक परीक्षाएं हो चुकी हैं, जबकि पहले सेमेस्टर का परिणाम ढ़ाई फीसदी रहा है।
17 मई से 28 जून तक का घटनाक्रम
अप्रैल के अंतिम सप्ताह में परीक्षाएं समाप्त हो गई थीं। 17 मई को कुछ कॉलेजों की लॉगिन आईडी पर परिणाम जारी किया था। इसी परिणाम के आधार पर 20 से 23 मई तक विश्वविद्यालय कार्यालय पर विद्यार्थियों ने फेल करने का आरोप लगाकर जबरदस्त हंगामा किया था। उस वक्त कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी और कुलसचिव गिरीश कुमार द्विवेदी ने कहा था कि यह आधिकारिक परिणाम नहीं है। 23 मई को हुए प्रदर्शन में जब विद्यार्थियों ने तीन दिन में परिणाम जारी करने और बिना परिणाम दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं न देने की मांग की तो कुलसचिव गिरीश कुमार द्विवेदी ने जल्द परिणाम जारी करने का आश्वासन दिया था।
जांच समिति बनवाने की मांग
केजीके कॉलेज के छात्र सचिन चौधरी ने कहा कि मेरी तीन विषयों में बैक लगी है। जब विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया था, तब कुलसचिव और डीन ने आश्वासन दिया था कि तीन दिन में परिणाम जारी करेंगे और दस-दस अंक ग्रेस के दिए जाएंगे। लेकिन न तो परिणाम तीन दिन में दिया और न ही ग्रेस दिया। दस से ज्यादा विद्यार्थियों की मेरे पास कॉल आई कि पांचों में फेल हैं। हमारी मांग है कि एक जांच समिति बनाई जाए, उसमें कुछ विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाए। एलएलबी के सभी विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए। हमारे कॉलेज में एक शिक्षक पर दो पेपर पढ़ाने की जिम्मेदारी है, लेकिन दूसरे सेमेस्टर में उन्होंने सिर्फ एक पेपर ही पढ़ाया है। कुलपति चाहें तो मामले की जांच करवा सकते हैं।
दूसरे विश्वविद्यालय में दाखिला लेने को होंगे मजबूर
छात्र दीपक शर्मा ने कहा कि मेरी पांचों पेपर में बैक आई है। मुझे 23, 24, 25 और 26 अंक दिए गए हैं। एक समान अंक आने पर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर संदेह है। दूसरे सेमेस्टर के पेपर हो गए। तीसरे सेमेस्टर में अब दस पेपर की परीक्षा देनी होगी। जल्द दूसरे सेमेस्टर का परिणाम जारी होना चाहिए। उसी के आधार पर इस विश्वविद्यालय से आगे की पढ़ाई के बारे में सोचेंगे। यदि दूसरे सेमेस्टर का भी परिणाम खराब हुआ तो अन्य विश्वविद्यालय से पढ़ाई करेंगे।
परिणाम को लेकर हमें धोखे में रखा गया
छात्र मोहम्मद इमरान ने कहा कि विश्वविद्यालय ने हमें धोखे में रखकर परिणाम जारी किया है। हमें आश्वासन दिया था कि परिणाम में संशोधन किया जाएगा। पांचों पेपर में मुझे फेल किया गया है। एक पेपर में मेरे शून्य अंक हैं। सोमवार को कुलपति से मुलाकात की जाएगी और विश्वविद्यालय कार्यालय पर धरना दिया जाएगा। दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं करवा लीं और प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए दबाव बनाया गया। यदि परिणाम खराब था तो हमें पहले बता देते तो पहल दूसरे सेमेस्टर के फॉर्म नहीं भरते। एक साथ दस पेपर पास करने का दबाव बन गया।
पांचों पेपर में फेल का मिला परिणाम
छात्र परवेज आलम ने बताया कि मुझे पांचों पेपर में फेल कर दिया है। मुझे दो, 12, 11, 13 और 14 अंक दिए हैं। दो महीने इंतजार के बाद यह परिणाम आया है। यह परिणाम वही है, जो कॉलेज के लॉगिन पर आया था। मेरे पिताजी मजदूरी करते हैं। घरवालों ने पढ़ाने से इन्कार कर दिया है। पढ़ाई का सपना अधूरा रह जाएगा। छात्र आनंद गुप्ता ने बताया कि मेरी पांचों पेपर में बैक आई है। हम एलएलबी पाठ्यक्रम बीच में ही छोड़ देंगे। घर बैठने को मजबूर हो जाएंगे। परिजन पहले ही परेशान थे कि पहले का परिणाम नहीं आया।
टाॅपर रही हूं और अब दो पेपर में फेल
छात्रा शिवांगी गुप्ता ने बताया कि यकीन नहीं हो रहा है कि विश्वविद्यालय ने किस आधार पर परिणाम दिया है। अभी तक के छात्र जीवन में मैं हमेशा की टॉप लिस्ट में रही हूं। कभी सेकेंड डिवीजन से पास नहीं हुई हूं। मैंने हिंदू कॉलेज से एमएससी गणित 73 फीसदी अंकों की थी और कॉलेज में पहले स्थान पर थी। बीकॉम ऑनर्स में 74 फीसदी अंक थे और एक दिन की स्वार थाने की इंजार्च रही हूं। मैं एक भी बैक का पेपर नहीं दूंगी। अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन करवाएंगे। यही बात छात्रा वंशिका कौशिक ने कहा। उसने बताया कि मुझे तीन पेपर में फेल किया गया है।
वर्जन...
समर्थ पोर्टल पर परिणाम को कन्फीगर करने में देरी हुई है, इसलिए परिणाम देरी से जारी किया गया है। एनईपी में कोई विद्यार्थी फेल नहीं होता है, उसकी बैक आती है। जिस पेपर में बैक आई है, उसकी बैक परीक्षाएं होंगी। विद्यार्थी परीक्षा देकर उसे क्लीयर कर सकते हैं। परिणाम आज ही जारी हुआ है तो उसका कॉलेज स्तर पर आंकलन किया है। यदि पढ़ाई का इश्यू होगा तो उसे दूर किया जाएगा। कोई और दिक्कत होगी तो उसका भी निराकरण किया जाएगा। जिन बच्चों ने शिकायत की थी, उनकी उत्तर पुस्तिकाएं देखी गई थीं। उसमें पाया गया कि ऐसी कोई समस्या नहीं है, जो विद्यार्थी कह रहे हैं। फिर भी विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका देख सकेंगे।
गिरीश द्विवेदी, कुलसचिव, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय