संभल के 16 साल पुराने हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राम अचल यादव की अदालत ने मुलजिम पिता और चार बेटों को उम्रकैद की सजा सुनाई। जबकि 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
संभल जनपद के नखासा थानाक्षेत्र के रुकुनुद्दीन सराय निवासी मो. आरिफ ने नौ अप्रैल 2003 को नखासा थाने में रुकुनुद्दीन सराय निवासी बुद्दन और उसके चार बेटे भूरा, शाहिद, शकील और नवाब के खिलाफ केस दर्ज कराया था। जिसमें उसने बताया कि मो. आरिफ अपने चाचा मो. रजी के साथ रसूलपुर के जंगल में जामुन के पेड़ के नीचे बैठे थे। इसी दौरान वहां बुद्दन और उसके चारों बेटे पहुंच गए। उन्होंने चाचा-भतीजे को घेर लिया और लाठी डंडों से हमला कर दिया था। जिसमें मो. रजी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दोनों पक्षों में पहले से मुकदमेबाजी चली अी रही थी। इसी रंजिश में आरोपियों ने हमला किया था। अगले ही दिन मो. रजी की मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने केस में 302 की धारा बढ़ा दी थी।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद पुलिस ने केस की तफ्तीश पूरी कराने के बाद पिता-पुत्रों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इस केस की सुनाई एडीजे प्रथम की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ब्रजराज सिंह ने पक्ष रखा और मुलजिमों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुलजिमों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। जबकि सभी पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।