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ठेकेदार के तीन हत्यारों को आजीवन कारावास

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मुरादाबाद। मझोला के सात साल पुराने चर्चित ठेकेदार सिकंदर आजम हत्याकांड में शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ग्यारह) सत्यप्रकाश द्विवेदी की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर तीनों मुलजिमों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि तीनों दोषियों को एक- एक लाख के अर्थदंड से दंडित किया है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मधुरानी ने बताया कि 10 जुलाई 2012 को मझोला के मानपुर नारायणपुर निवासी शंकर लाल के खेत में दोपहर बारह बजे एक अज्ञात युवक का शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई थी। इस संबंध में मझोला थाने में केस दर्ज किया गया था। जबकि कोतवाली में हीना परवीन ने अपने पति मो. सिकंदर आजम के गायब होने की तहरीर दी थी। उसने बताया था कि उसके पति फैक्टरी में मोमबत्ती बनाने की ठेकेदारी करते थे। नौ जुलाई 2012 को वह रेलवे स्टेशन पर मोनू की चाय की दुकान पर गए थे। इसके बाद वह वापस नहीं आए। हीना परवीन ने मोर्चरी में पहुंचकर शव देखकर मृतक की पहचान अपने पति के रूप में की थी। मझोला पुलिस ने इस मामले में चाऊ की बस्ती निवासी मोनू, अवधेश और लल्ला उर्फ राज को गिरफ्तार कर ठेकेदार सिकंदर हत्याकांड का खुलासा किया था। पुलिस ने दावा किया था कि अवधेश सिकंदर के पास मोतबत्ती बनाने का काम करता था। लेकिन सिकंदर ने उसे काम से हटा दिया था। इसी रंजिश में अवधेश ने अपने साथी मोनू और लल्ला उर्फ राज के साथ मिल कर सिकंदर की हत्या कर दी थी। इसके बाद लाश मझोला क्षेत्र में मानपुर नारायणपुर स्थित खेत में फेंक दी थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस केस की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ग्यारह सत्य प्रकाश द्विवेदी की अदालत में हुई। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने, साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन करने व गवाहों की गवाही के आधार पर तीनों मुलजिम मोनू, अवधेश, और लल्ला उर्फ राज को हत्या में दोषी करार दिया। अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास और एक एक लाख के अर्थदंड से दंडित किया है।
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