इससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी। लोग अकेले खेतों पर जाने से बच रहे थे। शाम होते ही ग्रामीण घरों में कैद हो जाते थे और खेतों की ओर जाने से भी परहेज कर रहे थे। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम ने पहले से दो ट्रैप केज लगा रखे थे। बुधवार को अभियान तेज करते हुए दो और पिंजरे लगाए गए।
इसके साथ ही खेतों और आसपास के इलाकों में थर्मल ड्रोन उड़ाकर तेंदुए की तलाश की गई। वनकर्मियों ने उसके पंजों के निशानों के आधार पर उसकी आवाजाही वाले स्थान चिह्नित किए और लगातार निगरानी रखी। बृहस्पतिवार को निगरानी के दौरान तेंदुआ ट्रैप केज में फंस गया।
उसके पिंजरे में कैद होने की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। लगातार हमलों के कारण कई दिनों से गांव में बना डर भी कम हुआ है।
11 दिन से चल रहा था रेस्क्यू अभियान
डीएफओ डॉ. विनय पांडे ने बताया कि क्षेत्र में तेंदुओं की सक्रियता को देखते हुए 11 दिन से रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा था। मलकपुर सेमली में तेंदुए ने तीन लोगों पर हमला किया था, जिसके बाद उसे पकड़ना वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ था। अभियान में मुरादाबाद वन प्रभाग के साथ वाइल्डलाइफ एसओएस आगरा की टीम और संभल, रामपुर, बिजनौर व अमरोहा वन प्रभागों के कर्मचारी भी जुटे रहे।
राईभूड़ में भी तेंदुए का हमला, किसान घायल
ठाकुरद्वारा क्षेत्र के गांव राईभूड़ में भी तेंदुए के हमले में एक और किसान घायल हो गया। तेंदुए के हमले के बाद परिजन किसान को निजी वाहन से सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका उपचार कराया गया। क्षेत्र में लगातार तेंदुओं की सक्रियता को देखते हुए वन विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं।
ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तीन तेंदुए पकड़े गए
वन विभाग के अनुसार ठाकुरद्वारा क्षेत्र में अब तक तीन तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है। मलकपुर सेमली में तेंदुए के पकड़े जाने के बाद वन विभाग ने राहत की सांस ली है, लेकिन आसपास के इलाकों में तेंदुओं की सक्रियता को देखते हुए निगरानी जारी रखी जा रही है।