कांठ। कांठ तहसील क्षेत्र में तेंदुओं का जबरदस्त आतंक और ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। जहां हर रोज कहीं न कहीं तेंदुए दिखाई दे रहे हैं तो वहीं उनके शावक भी लगातार मिल रहे हैं। अब तो तेंदुओं के द्वारा हमला कर लोगों को घायल भी किया जा रहा है। इसके बाद भी वन विभाग कुछ नहीं कर पा रहा है।
पिछले दो महीने से तेंदुओं का आतंक कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। 30 जनवरी को कांठ के फजलाबाद में तेंदुए ने गोवंशीय पशु को निवाला बना लिया था। तीन फरवरी को छजलैट के वैरमपुर निवासी राहुल के खेत में तेंदुआ दिखा था। पांच फरवरी को मुंडाला के नीटू के कुत्ते को तेंदुआ उठा ले गया था। 18 फरवरी को नसीरपुर में मृत तेंदुआ मिला था। 19 फरवरी को लाडलाबाद के जंगल में तेंदुए ने वनरोज पर हमला कर दिया था। 20 फरवरी को अहमदपुर निंगू नंगला में कार सवारों को दो तेंदुए दिखे थे। 24 फरवरी को दरियापुर से गश्त कर लौट रही पुलिस टीम के सामने तेंदुआ आ गया था। 25 फरवरी को समंदपुर के पूर्व प्रधान योगेश सिंह के खेत में तेंदुआ देखा गया था। 12 मार्च को मुख्त्यारपुर नवादा में नहर के किनारे कार सवारों ने तेंदुआ देखा था। 14 मार्च को लदावली और सुंदरपुर चाऊपुरा में दो तेंदुए दिखाई दिए थे। 19 मार्च को दयानाथपुर में तेंदुए के दो शावक मिले थे। 21 मार्च को मल्हपुर खैईया में तेंदुए ने गोवंश को निवाला बनाया था। 23 मार्च को फत्तेहपुर के किसान विजेंद्र सिंह को तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया था। 28 मार्च को सलेमपुर में दो शावक सहित तेंदुआ दिखाई दिया था। 30 मार्च को दिन में फजलाबाद में दो शावक मिले तो देर शाम को महदूद कलमी में तेंदुए ने बच्ची सिदरा को घायल कर दिया था।
दो दिन से लगातार तेंदुओं द्वारा हमले किए जाने से क्षेत्र में दहशत और बढ़ गई है। गांव महदूद कलमी, हसनगढ़ी, कुम्हरिया जुबला, जहांगीरपुर चकफेरी, गदापुर, मिश्रीपुर, मंझरा, बेगमपुर, खूंटखेड़ा, हीरापुर, ध्यानपुरा, भागीजोत सहित खादर क्षेत्र के तमाम गांवों में तेंदुए की दहशत व्याप्त हो गई है। जबकि पहले से ही क्षेत्र के गांव सलेमपुर, फजलाबाद, दरियापुर, राजीपुर खद्दर, मल्लीवाला, अकबरपुर चैदरी, गढ़ी, सिकंरादबाद, गोपालपुर, बहादरपुर खद्दर, फत्तेहपुर विश्नोई, मुख्त्यारपुर नवादा, नसीरपुर, हरिनूरपुर, डेहरा, मल्हपुर खैईया, नजराना, मुंडाला, फलैदा, वैरमपुर, चंगेरी के ग्रामीण भयभीत हैं। किसान खेतों पर जरूरी काम करने के लिए जाने से भी कतराते हैं, तो वहीं बच्चों को भी अकेले घरों से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है। वन विभाग भी लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है। संवाद