मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति के 12 लोगों की 104 बीघा जमीन की गुरुवार को भी पैमाइश कराई जाएगी। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार को रात हो जाने की वजह से पैमाइश पूरी नहीं हो पाई है। इस वजह से गुरुवार को भी पैमाइश जारी रहेगी। उनका कहना है कि यह कार्रवाई राजस्व परिषद के निर्णय के मद्देनजर की जा रही है। क्योंकि इस जमीन को राज्य सरकार में निहित घोषित कर दिया गया है।
सींगनखेड़ा के अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन 2007 के आसपास जौहर ट्रस्ट के नाम पर खरीद गई है। बाद इस जमीन को जौहर यूनिवर्सिटी की परिसर में शामिल कर लिया गया। इस मामले की शिकायत की गई थी कि अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन सामान्य वर्ग का व्यक्ति या संस्था नहीं खरीद सकता है। इसकी अनुमति भी जिलाधिकारी से नहीं ली गई थी। जिस आधार पर राजस्व परिषद में 10 वाद दायर किए थे। राजस्व परिषद ने इस पर सुनवाई करते हुए जमीन के विक्रय को गलत करार दिया था और जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का फैसला सुनाया था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने जमीन को अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की। सूत्रों की माने तो प्रशासन गुरुवार को अन्य मामलों में भी जमीन की पैमाइश करा सकती है।
वीसी के अनुरोध के प्रशासन सील नहीं किया प्रशासनिक भवन
रामपुर। श्रम विभाग का सेस जमा कराने के मामले में प्रशासन के पास यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन को सील करने का आदेश था। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने एसडीएम से अनुरोध किया कि भी परीक्षा चल रही है। ऐसे में अगर प्रशासनिक भवन को सील किया गया तो परीक्षा प्रभावित हो सकती है। इस अनुरोध के बाद एसडीएम ने यूनिवर्सिटी की दो निर्माणाधीन बिल्डिंगों को सील कर दिया।
शिकायतकर्ता ने कहा सच की जीत हुई है
अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन को नियम ताक पर कर खरीद करने और सेस नहीं जमा करने के मामले की शिकायत करने वाले भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना का कहना है कि इस मामले में सच की जीत हुई है। सेस का राशि तो और बननी चाहिए थी।