मुरादाबाद। विधानसभा चुनाव में जिले की छह में से पांच सीटें फिर लोकसभा चुनाव में मिली हार से भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता निराश थे। ऐसे में कुंदरकी उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को मिली बंपर जीत संजीवनी का काम करेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि अब 2027 का चुनाव इसी फार्मूले पर लड़ा जाएगा।
2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में बड़ी जीत दर्ज कर भाजपा की सरकार बनी थी, लेकिन जिले में मुरादाबाद शहर छोड़कर अन्य सभी सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों को हार मिली थी। जिले की पांच सीटों पर सपा की साइकिल दाैड़ी थी। लोकसभा चुनाव 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेताओं की सभा के बाद भी पार्टी को मुरादाबाद और संभल लोकसभा सीट पर सपा से हार का सामना करना पड़ा था।
जीत के नाम पर भाजपा के हाथ एमएलसी (शिक्षक) चुनाव था। इसमें डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त ने सफलता हासिल की थी। लोकसभा चुनाव हारने पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह पर भी सवाल उठने लगे थे। इसके बाद कुंदरकी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी ने काफी जोर लगाया। मुख्यमंत्री चुनाव की घोषणा से पहले और फिर चुनाव प्रचार के लिए मुरादाबाद आए।
प्रदेश सरकार के चार मंत्रियों धर्मपाल सिंह, जेपीएस राठौर, जसवंत सिंह सैनी और गुलाब देवी को कुंदरकी विधानसभा सीट पर जीत दिलाने के लिए लगाया गया। क्षेत्र में चार सड़कों और स्टेडियम की मंजूरी दी गई। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने अल्पसंख्यक सम्मेलन किया। इन सभी समीकरणों से भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह ने कुंदरकी में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का भी कद बढ़ा
कुंदरकी विधानसभा की जीत से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह का भी कद बढ़ा है। गृह जनपद होने के कारण कुंदरकी उपचुनाव को प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा था। लोगों का कहना था कि यह उपचुनाव 2027 विधानसभा का ट्रेलर है।