2012 में भाजपा ने रामवीर सिंह को कुंदरकी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा था। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी का मुकाबला सपा प्रत्याशी रिजवान से था। इस चुनाव में सपा को 81,302 और भाजपा को 64,101 मत मिले थे और रामवीर सिंह को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा था।
2017 में भाजपा ने रामवीर सिंह पर फिर भरोसा जताया और उन्हें कुंदरकी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा। उनका मुकाबला सपा प्रत्याशी रिजवान से हुआ। रिजवान को 1,10,561 मत और भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह को 99,740 वोट मिले थे। इस प्रकार रामवीर सिंह 10821 मत से दोबारा मोहम्मद रिजवान से चुनाव हार गए।
हालांकि, भाजपा ने 2022 में कमल प्रजापति को चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन प्रत्याशी बदलने के बाद भी परिणाम नहीं बदला और भाजपा प्रत्याशी को सपा प्रत्याशी जियाउर्रहमान बर्क से 42,998 मतों से चुनाव में हार मिली। अब पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि रामवीर 2024 उपचुनाव में भाजपा की नैय्या पार लगा सकते हैं।
हालांकि, कुंदरकी सीट पर तीसरी बार रामवीर सिंह का मुकाबला सपा के मोहम्मद रिजवान से ही है। भाजपा के जिलाध्यक्ष आकाश पाल का कहना है कि रामवीर सिंह कुंदरकी उपचुनाव में मजबूत प्रत्याशी साबित होंगे। पार्टी ने क्षेत्र में काफी विकास कार्य किया है। संगठन पूरी ताकत के साथ लगा हुआ है।
ब्लाॅक प्रमुख रह चुकी हैं रामवीर की पत्नी
भाजपा प्रत्याशी ठाकुर रामवीर सिंह के पिता शिवराज सिंह मूंढापांडे सहकारी समिति के सभापति रहे हैं। वहीं उनके बड़े भाई जसवीर सिंह 35 साल तक गांव दौलारी के ग्राम प्रधान रह चुके हैं। दौलारी निवासी रामवीर सिंह ने एमए एलएलबी तक की पढ़ाई करने के बाद 1993 में भाजपा का दामन थामा। 1999 में किसान मोर्चा के महामंत्री रहे।
2005 में वह पार्टी के जिला महामंत्री। इसके अलावा 2015 में वार्ड 48 से जिला पंचायत सदस्य चुने गए। उनकी पत्नी संतोष कुमारी 2001 में मूंढापांडे की ब्लाॅक प्रमुख रह चुकी हैं। वर्तमान में वार्ड 31 से जिला पंचायत सदस्य हैं। रामवीर सिंह के भाई जयवीर सिंह भाकियू टिकैत गुट के जिला उपाध्यक्ष हैं। पांच भाइयों में रामवीर सबसे छोटे हैं। उनके दो भाइयों की माैत हो चुकी है।