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मुरादाबाद में कुमार विश्वास: कोई दीवाना कहता है.. कोई पागल समझता है, समय बीतने के साथ बढ़ती गई तालियां

Mon, 12 Feb 2024 04:09 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
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मुरादाबाद में कवि सम्मेलन के दौरान डॉ. कुमार विश्वास - फोटो : अमर उजाला
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है। मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है। प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने रेलवे स्टेडियम में सजे मंच से जब अपनी ये सर्वाधिक चर्चित पंक्तियां पढ़ीं तो लोगों ने संग संग गुनगुनाया। कविता की खुमारी इस तरह थी कुमार शांत हो गए और अगली पंक्ति... मैं तुझसे दूर कैसा हूं, तू मुझसे दूर कैसी है। ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है लोगों ने गाई।
 
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मुरादाबाद कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
डॉ. कुमार विश्वास के अलावा दिनेश बावरा, सोनी मिश्रा, अज्म शाकिरी व रमेश मुस्कान ने कविताएं सुनाईं। मौका था स्कॉलर्स डेन की ओर से आयोजित ऊर्जा सत्र व कवि सम्मेलन का। डॉ. कुमार विश्वास के जन्मदिन का उत्सव भी मंच पर मनाया गया। इसके बाद कवि ने आईआईटी, नीट के लिए तैयारी कर रहे विद्यार्थियों में ऊर्जा सत्र में जोश भरा। कविता की शुरुआत पहले कवि के रूप में मंच पर दिनेश बावरा ने की।
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मुरादाबाद कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने मोबाइल पर कटाक्ष किया। कहा कि सूरज तेजी से ढल रहा है, जमाना रोज बदल रहा है। एक संत ने टीवी पर प्रवचन देते हुए कहा, यदि मोह माया से दूर रहना चाहते हो तो मुझे लाइक करो। साथ में मेरा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करो। उन्होंने मोबाइल का सीमित प्रयोग करने व अपनों को समय देने की अपील की।
 
 

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मुरादाबाद कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ से आईं कवयित्री सोनी मिश्रा ने प्रेम की गजल सुनाई। कहा कि हो सके तो परदेसी लौट कर के घर आना। वास्ता मेरा तुझको भूल तू नहीं जाना। शाम ले के आएगी फिर तुम्हारी यादों को, मैं तुम्हारी शम्मा हूं, तू है मेरा परवाना। मशहूर शायर अज्म शाकिरी ने पढ़ा कि अब न रोएंगे हम खुशी के लिए, गम ही काफी है जिंदगी के लिए। इसके बाद कहा कि लाखों सदमें, ढेरों गम फिर भी नहीं हैं आंखें नम। एक मुद्दत से रोए नहीं, क्या पत्थर के हो गए हम।
 
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मुरादाबाद कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
हास्य कवि रमेश मुस्कान ने अपनी कविता से सबको खूब गुदगुदाया। उन्होंने सुनाया कि ओ कंप्यूटर युग की छोरी, मन की काली तन की गोरी। किंचित अपनी बाहों का गलहार नहीं दे पाऊंगा। तुम मुझको करना माफ मैं तुमको प्यार नहीं दे पाऊंगा। अंत में डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को देर तक तालियां बजाने को मजबूर कर दिया।
 
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मुरादाबाद कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने सुनाया कि तुझी में रात हो जाना, तुझी से भोर हो जाना। तेरी खामोशियों से जिंदगी में शोर हो जाना। इसके अलावा मिले हर जख्म को मुस्कान से सीना नहीं आता, मैं अपने गीत गजलों से उसे पैगाम करता हूं, किसी के दिल की मायूसी जहां से होके गुजरी है, मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है आदि चर्चित मुक्तक सुनाए।

इस मौके पर महापौर विनोद अग्रवाल, कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह, एसएसपी हेमराज मीना, एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया, डीआरएम राजकुमार सिंह, स्कॉलर्स डेन के प्रबंध निदेशक विवेक ठाकुर समेत विभिन्न दलों के नेता व विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
 
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मुरादाबाद कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला

सराहा गया चलो अब लौट चलें रघुराई गीत

डॉ. कुमार विश्वास ने मां सीता पर गीत सुनाया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके बोल थे... चलो अब लौट चलें रघुराई। देवों का दुनिया का सपना, तुमने मान लिया था अपना। पर मेरी सांसों ने जाना, केवल नाम तुम्हारा जपना। सोने के माया मृग पीछे प्रभुता क्यों बौराई, चलो अब लौट चलें रघुराई। राधा-कृष्ण पर गीत सुनाया कि कब तक गीत सुनाऊं राधा... कब तक गीत सुनाऊं। मथुरा छूटी, छूटी द्वारिका, इंद्रप्रस्थ ठुकराऊं। मंच से जिगर मुरादाबादी, हुल्लड़ मुरादाबादी और नवगीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी का नाम लिया गया।

 
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मुरादाबाद कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला

बच्चों पर मत लादिए अपने असफल सपनों का बोझ

ऊर्जा सत्र में डॉ. कुमार विश्वास ने परिजनों से अपील करते हुए कहा कि अपने असफल सपनों का बोझ अपने बच्चों पर मत लादिए। विद्यार्थियों से कहा कि मैं भी असफल आदमी हूं। जब आईआईटी, नीट में सफलता न मिले सोचना कि कुमार विश्वास बन जाऊंगा। किसी परीक्षा को इतना महत्व मत देना कि तुम्हारी जिंदगी से बढ़कर हो जाए। सौभाग्य व दुर्भाग्य को कभी लम्हों में मत गिनना। जिसने तुम्हारा भाग्य लिखा है उसने अंत तक देखा है। इसलिए ईश्वर पर भरोसा रखना और सोचना कि इसमें कुछ अच्छा ही होगा।

 

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