बिलारी। हरिद्वार की साध्वी महात्मा विजेताबाई ने कहा कि मानव का महान सद्गुण सद्भावना है। राग, द्वेष आदि विकारों से दूर रहने के लिए ज्ञान की परम आवश्यकता है। एक ज्ञानी व्यक्ति ही सद्भावपूर्वक ईश्वर की सर्व व्यापकता पर विचार कर सकता है।
महात्मा विजेताबाई शनिवार दोपहर नगर के एक मैरिज हॉल में मानव उत्थान समिति बिलारी के तत्वावधान आयोजित सद्भावना संत समागम में भक्तों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आज के वैज्ञानिक युग में व्यर्थ के वैराग्य और अविवेक के कारण विश्व का मानव महाघातक अस्त्र-शस्त्र का संग्रह कर रहा है। इन हालात में मानव जगत बारूद के ढेर पर बैठा है, बटन दबाते ही विकराल विनाश हो सकता है।
सद्भावना समागम में हरिद्वार से आए महात्मा हरि संतोषानंद कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में समझाया है कि जब व्यक्ति शरीर के तत्वों से उत्पन्न तीन गुणों सत्व, रजस और तमस को पार कर जाता है तब वह जन्म मृत्यु, वृद्धावस्था और अन्य सभी दुखों से मुक्त हो जाता है।
महात्मा ने कहा कि गुणों की प्रकृति को पार करना यानी इनके प्रभावों से परे होना ही मोक्ष की ओर ले जाता है। तब व्यक्ति वास्तविक सुख, शांति और अमृत का अनुभव करता है। सत्संग आयोजन में देशराज सिंह, कुलदीप सिंह, मुनेश प्रजापति, दिनेश प्रजापति, कुंवरपाल सिंह,नागेंद्र सिंह, हेमपाल सिंह आदि का सहयोग रहा। संवाद