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फिरौती के लिए कारोबारी के बेटे की हत्या के दोषियों को उम्रकैद

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मुरादाबाद। एडीजे न्यू कोर्ट के जज पंकज जायसवाल की अदालत ने गुरुवार को नागफनी के ग्यारह साल पुराने चर्चित अनस अपहरण हत्याकांड में दोनों मुलजिमों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी। पीतल कारोबारी के पांच साल के बेटे अनस की फिरौती के लिए अगवा करने के बाद हत्या कर दी गई थी। अदालत ने दोनों दोषियों पर 70 हजार रुपये काअर्थदंड भी लगाया है। कारोबारी का कहना है कि इस मामले में पैरवी न करने के लिए आरोपी पक्ष द्वारा उसे पैसों का लालच दिया और धमकी भी दी गई। बावजूद इसके उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखी और नतीजा इंसाफ के रूप में आया।
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नागफनी थानाक्षेत्र के किसरौल दीवान खाना निवासी पीतल कारोबारी मोहम्मद अकरम उर्फ गुड्डू के पांच साल के बेटे अनस को सात फरवरी 2009 की शाम अगवा कर लिया गया था। उस वक्त बच्चा अपने घर से बाहर खेल रहा था। इसके बाद अपहरण करने वाले आरोपियों ने अनस के पिता से फोन पर फिरौती मांगी थी। दस फरवरी 2009 को अनस की लाश सिविल लाइंस क्षेत्र के प्रेम वाली गली में नाले से बरामद हुई थी। पीएम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से पंद्रह फरवरी 2009 को इस मामले में नायाब और गुफरान निवासी किसरौल दीवान खाना थाना नागफनी को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उसके कब्जे से वह मोबाइल भी बरामद किया था, जिससे फिरौती की मांग की गई थी। पुलिस ने केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद चार्जशीट अदालत में पेश की थी। इस केस की सुनवाई एडीजे न्यू कोर्ट पंकज जायसवाल की अदालत में चली। इसमें सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नाहर सिंह त्यागी ने पक्ष रखा और मुलजिमों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों की गवाही व साक्ष्यों के आधार पर मुलजिम नायाब व गुफरान को अपहरण, हत्या, साक्ष्य छिपाने में दोषी मानने हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि दोनों पर 70 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की रकम से आधी धनराशि वादी को देने के आदेश दिया है।
‘ताकि किसी और के बच्चे के साथ न कर दें वारदात, इसलिए लड़ता रहा यह लड़ाई’
- पीतल कारोबारी अकरम बोले, 11 साल तक लड़ा, देर से ही सही पर इंसाफ मिला’
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद।
बेटे के हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा मिलने पर पीतल कारोबारी मोहम्मद अकरम का गला भर आया। बोले कि ‘मैने बेटे के कातिलों को सजा दिलाने के लिए ग्यारह साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी है। लालच दिया पर जब मैं लालच में नहीं आया तो मुझे आरोपी पक्ष ने जान से मारने की धमकियां तक दीं। लेकिन मैं न तो लालच में आया और न ही धमकियाें से डरा। मेरा बेटा तो अब वापस नहीं आएगा, लेकिन कातिल सलाखाें में रहेंगे तो दूसरों के बच्चे भी सुरक्षित रहेेंगे। ऐसे लोगों का क्या पता। कब किसके बेटे को अगवा कर लें। सात फरवरी 2009 की वो शाम आज भी जब याद आती है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मेरे परिवार के सदस्य आज भी सुबकते हैं। मेरा बेटा अनस घर के बाहर से ही अचानक गायब हो गया था। कुछ पता नहीं चला। फिर एक कॉल आई। कॉल करने वालों ने फिरौती मांगी तो पूरा परिवार डर गया। तीन दिन बाद बच्चे की लाश सिविल लाइंस क्षेत्र में मिली थी। लाश बरामद होने के बाद पांच दिन बाद ही पुलिस ने नायाब और गुफरान को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा किया था। उससे पहले तो हम यही सोचते रहे कि सभी लोग हमारे साथ हैं। सबने हमारे बच्चे को ढूंढने में मदद की। जब मुझे सच्चाई का पता चला तभी मैंने सोच लिया था कि इन हत्यारों को माफ नहीं करुंगा। कितनी भी लंबी कानूनी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े। लड़ता रहूंगा। तारीख पर जाने पर डर तो लगता था कि कहीं कोई घटना मेरे साथ न हो जाए, लेकिन बेटे के हत्यारों को सजा दिलानी थी। यही सोचकर हिम्मत आ जाती थी। हत्यारे हमारे दूर के रिश्तेदार भी लगते थे। इस लिहाज से कुछ लोगों ने बीच में पड़कर समझौता कराने का प्रयास किया। लेकिन मैंने समझौता करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद मुझे धमकियां भी मिलीं। कचहरी पर तारीख जाते समय हत्या करने की धमकियां दी गईं। ताकि मैं डर कर घर में बैठ जाऊं या समझौता कर लूं। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं आ रही है। न्याय पालिका पर शुक्रगुजार हूं। मुझे इंसाफ मिला।
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फिरौती की रकम ली, फिर भी कर दी थी अनस की हत्या
मुरादाबाद। करीब ग्यारह साल पहले शहर को झकझोर देने वाले अनस हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपी नायाब और गुफरान ने फिरौती के 50 हजार रुपये भी ले लिए थे। इसके बाद भी मासूम की हत्या कर उसकी लाश सिविल लाइंस क्षेत्र में फेंक दी थी।
उन्होंने कारोबारी को धमकी दी थी कि अगर पुलिस को सूचना दी तो वो उसके बेटे की हत्या कर देंगे। अनस दोनों आरोपियों को जानता था। उन्हें डर था कि अगर बच्चे को छोड़ दिया गया तो वो उनका भेद खोल देगा। इसलिए गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी। कारोबारी ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें कॉल कर डिप्टी गंज के पास कब्रिस्तान में फिरौती की रकम रखने को कहा था। वो रकम भी रख आया था। इसके बाद आरोपियों का मोबाइल बंद हो गया था। दस फरवरी 2009 को अनस का शव प्रेम वाली गली में नाले में मिली थी।
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