जिगर कालोनी स्थित मकान में डेढ़ साल पहले संदिग्ध हालत में मृत मिले मो. कफिल की मौत दम घुटने से हुई थी। आगरा फोरेंसिक लैब से आई रिपोर्ट से इसकी पुष्टि हुई है।
जिगर कालोनी स्थित एक मकान में संभल निवासी कफिल और फहीम ई कचरा जलाने का धंधा करते थे।
29 सितंबर 2015 को कंप्यूटर की प्लेटें गलाते वक्त केमिकल डालने पर रिएक्शन हो गया था। जिससे कमरे में गैस फैल जाने के कारण कफिल, फहीम और उसकी पत्नी अलीसा बेहोश हो गए थे। लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
जिसमें पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर फहीम को जेल भेज दिया था। जबकि निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कफिल की मौत हो गई थी। पुलिस ने कफिल के शव का पोस्टमार्टम कराया था। लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था। विसरा सुरक्षित रखा गया था। आगरा फोरेंसिक लैब से विसरा रिपोर्ट आई।
जिसमें में बताया गया है कि कफिल की मौत दम घुटने से हुई थी। भले ही फोरेंसिक रिपोर्ट डेढ़ एक साल बाद आई हो। लेकिन उससे साफ हो गया है कि जिगर कालोनी स्थित मकान में ई-कचरा जलाया जा रहा था। कफिल की मौत भी ई-कचरा जलाने से उठी गैस के कारण दम घुटने से मौत हुई थी।
शहर का ये इकलौता मकान नहीं है। जहां ई-कचरा जलाया जा रहा है। शहर में तमाम ऐसे मकान हैं जहां इस जहरीले धंधे को अंजाम दिया ज रहा है। दूसरों जिंदगी के साथ ही लोग अपनी जीवन में भी जहर घोल रहे हैं। एनजीटी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देशित कर चुका है कि मुरादाबाद में जहां- जहां ई-कचरा जलाया जाता है।
वहां का निरीक्षण करके रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। ई-कचरा के धंधे से रामगंगा नदी का पानी जहरीला हो रहा है। मुरादाबाद में रामगंगा नदी किनारे ई-कचरा के ठिकाने बने हैं। जबकि घरों के अंदर कंप्यूटर प्लेटें जलाई जाती हैं। जिससे पूरे शहर की हवा जहरीली हो रही है। लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है। टीबी और दूसरी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं।