इसके बाद शुक्रवार को लोगों ने इसे खूब सुना। असीम सक्सेना द्वारा प्रस्तुत इस ब्रॉडकास्ट की शुरुआत दादा माहेश्वर की मनहर आवाज से होती है। वह गीत सुना रहे हैं... मुझमें कोई धीरे-धीरे गुम हो जाता है। उससे शायद कई जनम का गहरा नाता है। बरेली निवासी कवि डॉ. राहुल अवस्थी के लेख का भी इसमें जिक्र किया गया है। वह नवगीतकार माहेश्वर तिवारी को आत्मीयता के अमलतास, हार्दिकता के हरसिंगार और नवगीतों के गुलमोहर कहते हैं। ब्रॉडकास्टर ने कहा कि संत कबीरनगर में जन्में नवगीतों के कबीर ने हिंदी कविता को नई राह दिखाई। यह बताया कि शांत मन से कविता-गीत सुनाना कितना प्रभावी हो सकता है। कार्यक्रम में बीच बीच में दादा की आवाज में उनके कई नवगीतों की पंक्तियां सुनाई दीं। वह कहते हैं कि मेरे भीतर बैठी नन्हीं चिड़िया गाती है। नवगीतकार योगेेंद्र वर्मा व्योम ने बताया कि आकाशवाणी के केंद्रीय संग्रहालय में माहेश्वर तिवारी का तीन घंटे का साक्षात्कार सुरक्षित है। जोकि तब रिकॉर्ड किया गया, जब पूरे देश से सिर्फ दो नाम चुने गए। इनमें एक वसीम बरेलवी और दूसरे माहेश्वर तिवारी थे।