J.S. Rastogi
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उम्र के जिस पड़ाव पर लोग जिंदगी से हिम्मत हार जाते हैं, उस पड़ाव पर भी डा. जेएस रस्तोगी अनुशासित जीवन शैली की मिसाल बने हुए हैं। डा. रस्तोगी एक दिन बाद अपनी उम्र का सैकड़ा लगाएंगे। लेकिन आज भी उनके जीवन शैली में कोई बदलाव नहीं आया।
समय से उठना, टहलाना, खाना और सोना सब कुछ सत्तर साल से एक सामान चला आ रहा है। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है। उन्हें 2010 में ओल्डेस्ट प्रैक्टिसनर फिजीशियन का खिताब भी मिल चुका है।
सिविल लाइंस निवासी डा. जेएस रस्तोगी का जन्म दो अक्तूबर 1916 को लखनऊ के सिटी स्टेशन और चौक मोहल्ले के बीच बसे राजा बाजार के रस्तोगी टोला में हुआ। वह केजीएमसी लखनऊ से 1936 बैच के एमबीबीएस हैं। 1941 में डाक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नैनीताल के भवाली सेनेटोरियम से डाक्टरी के सफर की शुरुआत की।
इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। डा. रस्तोगी अपनी डाक्टरी पेशे के साथ अनुशासित जीवन शैली के लिए भी जाने जाते हैं। उम्र के कई पड़ाव आए। समय बदलता गया, लोग भी बदलते गए। लेकिन तीस साल की उम्र से शुरू हुआ मार्निंग वाक का जज्बा आज भी बरकरार है। जिसे घुटने का दर्द भी नहीं डिगा पाया।
हालांकि पिछले पांच सालों से वह पार्कों में नहीं अपने गार्डन में टलते हैं। अपनी अनुशासित जीवन शैली की बदौलत वह रोगों और नशा पान से दूर रहे। सौ साल की उम्र से एक दिन दूर डा. रस्तोगी की आंखें युवाओं से तेज हैं।
बेटे डा. अमित रस्तोगी का कहना है कि ठंड हो या गर्मी या फिर बरसात वह हर सीजन में मार्निंग करना नहीं भूलते हैं। उनके खाने, सोने, जागने हर चीज का समय तय है। यही नहीं दूसरों को भी अनुशासित जीवन शैली अपनाने की नसीहत देते हैं।