मुरादाबाद। सोनकपुर स्टेडियम में खेलों को बढ़ावा देने के लिए शिविरों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन जिम नहीं होने की वजह से खिलाड़ियों का खेल का प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि बड़ी प्रतियोगिताओं को जीतने के लिए शारीरिक रूप से फिट होना पड़ेगा, जो जिम में अभ्यास के बाद ही संभव है।
कबड्डी के खिलाड़ियों ने बताया कि जिम नहीं होने की वजह से सिर्फ मैदान पर ही अभ्यास करना पड़ रहा है। दौड़ के ऊपर फिटनेस निर्भर होने के कारण चोटिल होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि जब रामपुर जिले में जिम की सुविधा है तो खेल निदेशालय को मंडल स्तर का स्टेडियम होने के बावजूद सोनकपुर स्टेडियम की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। खिलाड़ियों इसके अलावा खिलाड़ियों ने फिजियोथेरेपिस्ट की भी मांग की।
क्या कहते हैं खिलाड़ी
प्रदेश स्तर पर गाजियाबाद और फैजाबाद में जीत दर्ज की थी। सिर्फ मैदानी खेल के सहारे जीत सुनिश्चित नहीं होती है। इसके लिए जिम में भी उतना ही अभ्यास करना जरूरी है, ताकि हमारे अंदर ताकत भी हो। रेड के समय विपक्षी खिलाड़ियों से बचने के लिए जरूरी है।
हितेश अहलावत, खिलाड़ी।
जिम नहीं होने की वजह से मशल्स कमजोर हैं। खेल के लिए पूरी तरह से फिट होने के लिए मशल्स का मजबूत होना उतना ही आवश्यक है, जितना अन्य गतिविधियां जरूरी हैं। स्टेडियम में जिम की सुविधा हो जाए तो जीत की उम्मीदों में भी बढ़ोतरी होगी।
विवेक शर्मा, खिलाड़ी।
एक खिलाड़ी के तौर पर हमें जिम की कमी खलती है। सांस उखड़ने की परेशानी का सामना करना पड़ता है। बड़े स्तर पर जाकर छोटी-छोटी कमियां ही हार का कारण बनती हैं। हमारे स्टेडियम में खिलाड़ियों को जिम की सुविधा मिलना बहुत आवश्यक है।
नमन चौधरी, खिलाड़ी।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग किया है। वहां पर खिलाड़ियों को तेजी के साथ मजबूती की जरूरत होती है। कड़ी मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन पावर और स्टेमिना की कमी है। स्टेडियम में सुविधा नहीं है, इसलिए अभी तक जिम का इस्तेमाल नहीं किया है।
अंकुश
खिलाड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। जिम खिलाड़ियों की मूलभूत जरूरत है। सोमवार को निदेशालय में जिम स्वीकृति को लेकर बात करूंगा।
अनिमेष सक्सेना, क्रीड़ा अधिकारी।