‘जाको राखे साईंया, मार सके न कोय’ यह कहावत आरपीएफ के उस जवान ऋषिपाल सिंह के साथ चरितार्थ हुई, जो पुलवामा में आतंकवादियों द्वारा विस्फोट कर उड़ाई गई सेना की गाड़ी के पीछे वाली गाड़ी में सवार था। सुरक्षित बचने के बाद जब ऋषिपाल ने घर फोन करके बताया तो परिजनों के होश उड़ गए। बुरी तरह घबराए सेना के जवान को परिजनों से तसल्ली दी।
क्षेत्र के गांव कालाखेड़ा निवासी ताराचंद का बेटा ऋषिपाल सिंह सीआरपीएफ में जवान है। वह गुरुवार को आतंकियों द्वारा विस्फोट कर उड़ाई गई सबसे पिछली बाली गाड़ी में अन्य साथी जवानों के साथ सवार था। विस्फोट के काफी देर तक धुएं में कुछ दिखाई नहीं दिया। इसके बाद राहत कार्य शुरू हुए। ऋषिपाल के छोटे भाई डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि 20 जनवरी को ऋषिपाल सिंह छुट्टी पर घर आए थे और 10 फरवरी को वापस चले गए थे। वह जम्मू कैंप में ठहरे हुए थे।
गुरुवार को अन्य जवानों के साथ गाड़ी में वह भी सवार थे। बताया कि जिस गाड़ी को आतंकियों ने टारगेट कर विस्फोट कर उड़ाया है। उसके पीछे वाली गाड़ी में भाई ऋषिपाल सिंह भी बैठे थे। उन्होंने हादसे के बाद घर फोनकर खौफनाक मंजर की जानकारी दी। तब से भाई से फोन पर संपर्क न होने से वह और सभी परिवार वाले परेशान हैं।