शासन से मिली धनराशि के खाते में होने के बाद भी उसे खर्च करने में दिलचस्पी नहीं दिखाने वाले 35 पंचायत सचिवों का जनवरी का वेतन रोक दिया गया है। इन सभी पंचायत सचिवों ने जिला स्तर पर व्यय प्रतिशत 42 फीसदी से भी कम धनराशि अभी तक व्यय की है। यह धनराशि ओडीएफ प्लस ग्राम पंचायतों के रूप में चयनित 306 ग्राम पंचायतों में विकास व साफ-सफाई के लिए दी गई थी।
डीपीआरओ वाचस्पति झा ने बताया कि जिले की 641 ग्राम पंचायतों में से 306 ग्राम पंचायतों का चयन ओडीएफ प्लस के रूप में किया गया है। इन ग्राम पंचायतों की जनसंख्या के आधार पर प्रति व्यक्ति 340 रुपये के हिसाब से ग्राम पंचायत की विशेष साफ-सफाई के इंतजाम के लिए धनराशि संबंधित ग्राम पंचायतों को भेजी गईं। इस तरह 306 ग्राम पंचायतों को 35.79 करोड़ रुपये की धनराशि पांच माह पूर्व ग्राम पंचायतों के खातों में भेजी गई। लेकिन खर्च कुल 14.59 करोड़ रुपये ही किया जा सका है। उच्चाधिकारियों की समीक्षा में पाया गया कि इनमें से 146 ग्राम पंचायतें ऐसी मिलीं जिनके सचिवों ने खाते में धनराशि होते हुए भी इसे संबंधित ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई के इंतजाम किए जाने पर खर्च नहीं किए। जिसे गंभीरता से लेते हुए ऐसी ग्राम पंचायतों के सचिवों को नौ जनवरी को नोटिस जारी कर 20 जनवरी तक जिला स्तर के सापेक्ष 42 फीसदी तक व्यय करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो सका। जिसे गंभीरता से लेते हुए 65 पंचायत सचिवों का जनवरी माह का वेतन रोकने का आदेश किया गया है।