मुरादाबाद। शहर के प्रमुख शिवालय 84 घंटा मंदिर में महाशिवरात्रि के पर्व पर डेढ़ लाख कांवड़ियों द्वारा जलाभिषेक किया जाएगा। मंदिर के महंत के अनुसार सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली गई हैं। शनिवार शाम चार बजे तक जलाभिषेक होगा। अन्य सभी शिवालयों में भी महाशिवरात्रि हर्षोल्लास से मनाई जाएगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। गुरुवार दोपहर को ही मंदिरों में साज-सज्जा का काम पूरा हो गया है। शाम से सभी मंदिर भव्य लाइटों से जगमग हो उठे। आधी रात से शिवालयों में रुद्राभिषेक का दौर शुरू हो गया, जबकि तड़के तीन बजे से कांवड़िए भगवान शिव का जलाभिषेक शुरू कर देंगे। इसके साथ ही शिवालय बम-बम भोले के उद्घोष से गूंजने लगेंगे।
पांच हजार वर्ष पुराना है 84 घंटा मंदिर
प्रमुख शिवालाय 84 घंटा मंदिर में सजावट को भव्य रूप देने के लिए मुंबई, दिल्ली और मेरठ से फूल मंगवाए गए हैं। गुरुवार को दिन भर कारीगर सजावट में जुटे रहे। छह क्विंटल फूलों से मंदिर परिसर को सजाया गया। सजावट में तीन तरह के गेंदे के फूल, जरवरा, गुलदावरी, रजनीगंधा गुलाब के फूलों के अलावा अशोक के पत्तों को लगाया है। मंदिर के पुजारी भी मूर्तियों की साफ-सफाई के साथ भगवान के शृंगार में लगे हुए थे। मंदिर के बाहर गली में भी सजावट की गई है। इसके अलावा मंदिर में घंटा चढ़ाने का भी महत्व है। महंत विष्णु दत्त ने बताया कि यह सिद्ध मंदिर करीब पांच हजार वर्ष पुराना है। मान्यता है कि जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी हो जाती है, वह 40 दिन तक दीपक जलाते हैं। इसके अलावा घंटा भी चढ़ाया जाता है। सन 1911 में नेपाल के राजा अपने परिवार के साथ आए थे। बताया जाता है कि उनके कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति पर उन्होंने मंदिर में अष्टधातु का घंटा चढ़ाया था। महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर आते हैं। सुबह तीन बजे से ही कांवड़ चढ़ना शुरू हो जाएगा। दिनभर में करीब डेढ़ लाख कांवड़ चढ़ेंगी। इसके अलावा करीब तीन से चार लाख श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। कांवड़ियों के ठहरने के लिए गंगामंदिर और एक धर्मशाला में व्यवस्था की गई है। गली में घुमने के बाद मुख्य द्वार से कांवड़ लेकर आते हैं। पुरुषों और महिलाओं के प्रवेश की अलग-अलग व्यवस्था रहेगी। मंदिर में शाम चार बजे से रात नौ बजे तक हवन किया जाएगा। इसके बाद रात 12 बजे से शनिवार शाम चार बजे तक जलाभिषेक होगा। ढ़ाई क्विंटल दूध का पंचामृत बंटवाया जाएगा। बाहर भंडारा भी लगता है। मंदिर रातभर खुला रहेगा।
शृंगार के बाद होगी महाआरती
झारखंडी बाबा मंदिर में गुरुवार को साफ-सफाई की गई। महंत बाबा भोलेनाथ योगीराज ने बताया कि गुरुवार रात 11 बजे से रुद्राभिषेक शुरू हो जाएगा। पंडित पुष्पराज शास्त्री रुद्राभिषेक करवाएंगे। सुबह चार बजे से कांवड़ चढ़ना शुरू होंगी। गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा, डेलिया आदि फूलों से सजावट होगी। शाम चार बजे भगवान का शृंगार किया जाएगा और रात आठ बजे तक महाआरती होगी। मंदिर में सावन की अपेक्षा महाशिवरात्रि पर कांवड़ कम चढ़ती हैं।
स्वयंभू हैं झारखंडी बाबा
महंत भोलेनाथ योगराज ने बताया कि यहां भगवान स्वयंभू हैं। हजारों वर्ष पुराना मंदिर है। यहां पर झांड़ियां थीं, इसलिए इसे झारखंडी भोलेनाथ कहा गया है। पहले बहुत छोटा मठ था। मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1992 में कराया गया है। यहां पर 40 दिन के दीपक जलाने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता हैं। अषाढ़, सावन और भादों में ज्यादा भीड़ रहती है।
प्राचीन मंदिर झांझनपुर के महंत पंडित केदानाथ मिश्र ने बताया कि इस बार वाहनों से ज्यादा श्रद्धालु कांवड़ लेकर आए हैं। शुक्रवार सुबह शिव महापुराण का समापन होगा। इसके बाद हवन और पूर्ण आहुति की जाएगी। सुबह चार बजे से कांवड़ चढ़ना शुरू हो जाएंगी। श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए बैरीकैडिंग की गई है। फलों का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
इसके अलावा माता मंदिर लाइनपार, मनोकामनाश्री हनुमान मंदिर, महाकालेश्वर धाम मंदिर, श्री शिव मंदिर सागर सराय, ढाब वाला मंदिर, ऋणमुक्तेश्वर मंदिर, किसरौल स्थित गंगा मंदिर, लोकोशेड स्थित शिव मंदिर, रामगंगा विहार स्थित शिवशक्ति मंदिर सहित शहर के सभी शिवालयों में जलाभिषेक किया जाएगा।