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राज्य सरकार नहीं, दिल्ली तय करती है फसलों का मूल्य : टिकैत

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अगवानपुर (मुरादाबाद)। उत्तर प्रदेश में किसानों को फसलों का पूरा दाम नहीं मिलता, जबकि कारोबारी और बिचाैलिये खूब लाभ उठा रहे हैं। चीनी के दाम बढ़ने के बावजूद गन्ने का मूल्य बढ़ने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। राज्य सरकार को गन्ने का मूल्य बढ़ाने की अनुमति नहीं है। दिल्ली के निर्देशों पर फसलों का मूल्य तय किया जा रहा है। यह बातें बुधवार को अगवानपुर में आयोजित किसान महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने कही।
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भाकियू (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि गन्ने का मूल्य 500 से बढ़ाकर 600 रुपये करना किसानों की प्रमुख मांग है, जिस पर सरकार से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा सरकार ने गन्ने के मूल्य में दो बार वृद्धि की थी। सवाल उठाया कि योगी सरकार गन्ने का दाम बढ़ाने में क्यों आनाकानी कर रही है। आरोप लगाया कि यह सरकार बेड़ियों में बंधी है और फैसला लेने में सक्षम नहीं है। उन्होंने योगी सरकार को किसानों की बदहाली के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया।

भूमि अधिग्रहण की तैयारी पर जताई चिंता
राकेश टिकैत ने मुरादाबाद के करीब 273 गांवों में भूमि अधिग्रहण की तैयारी पर सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों की जमीन के दाम ठीक हैं लेकिन 2047 तक 70 फीसदी किसानों की भूमि पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को दी जा चुकी होगी। सरकार जल्द ही इन गांवों की जमीन उद्योगपतियों को ओने-पौने दामों पर देना शुरू कर देगी, जिसके बाद यहां बड़ी परियोजनाएं लगेंगी। इसके बाद किसान और उनके बच्चे इन फैक्टरियों में मजदूरी करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने किसानों को सावधान रहने और बहकावे में आकर अपनी जमीन का सौदा न करने की सलाह दी।
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बिचौलिये दिखा रहे शहर में मकानों के सपने
टिकैत ने कहा कि बिचाैलिये शहर में अच्छे मकानों का सपना दिखा रहे हैं। बताया कि ये बिचौलिये किसानों से कहते हैं कि गांव की जमीन में कुछ नहीं रखा है। इसे बेचकर शहर में रहोगे तो परिवार की परवरिश ठीक होगी और अच्छा मकान भी होगा। उन्होंने किसानों को बहकावे में न आने की सलाह दी। जोर देकर कहा कि गांव की जमीन सोना है।

बोले-पांच साल पुरानी डीजल गाड़ी पर दिल्ली में होगा प्रतिबंध
टिकैत ने कहा कि जल्द ही दिल्ली में पांच साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर प्रतिबंध लग जाएगा। कहा कि किसानों के पास 10 साल से भी पुराने डीजल ट्रैक्टर हैं। इस नियम के बाद उन्हें दिल्ली में प्रवेश की अनुमति कैसे मिलेगी। उन्होंने किसानों से मिलकर सरकार से लड़ने का आह्वान किया।
कहा कि आम के बागों में दवाओं के अत्यधिक प्रयोग से आम की मिठास कम होने पर नेपाल ने भारतीय आम लेना बंद कर दिया। वहीं दुबई भी भारतीय गेहूं और चावल लेने में आनाकानी कर रहा है। टिकैत ने किसानों को जैविक खेती की ओर लौटने की सलाह दी। कहा कि फसल का उचित दाम न मिलने पर खेती का कोई फायदा नहीं है।
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