इस ‘बालर’ की खूबियां अनूठी हैं। कभी यह रावल पिंडी एक्सप्रेस (शोएब अख्तर) से भी तेज गेंदबाजी करेगा तो कभी स्पिनर हरभजन से भी धीमी। जाहिर है कि बल्लेबाजों की प्रैक्टिस के लिए बेहद मुफीद है। दरअसल यह बालर कोई इनसान नहीं बल्कि एक मशीन है जिसकी ईजाद पीतल नगरी के कारीगर इरशाद ने किया है।
वर्चुअल बालर नाम से यह मशीन सेटिंग के हिसाब से बल्लेबाजों पर बाउंसर, यार्कर, हाफवाली, शार्ट पिच, बीमर, चाइनमैन, दोहरा की बारिश कर सकेगी। उनके द्वारा बनाई गई मशीन को सोनकपुर स्टेडियम में परीक्षण के लिए रखा गया है।निर्माता इरशाद अली के मुताबिक मशीन के आटो फीडर में 24 गेंदों को एक साथ रखा जा सकता है।
मशीन से गेंदे पांच से दस सेकेंड के अंतराल पर बाहर निकलेंगी। मशीन से निकलने वाली बॉल की स्पीड 20 किलोमीटर से लेकर 160 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। वील की सेटिंग के बाद मशीन से निकलने वाली गेंद खुद बा खुद लेग ब्रेक, ऑफ ब्रेक, चाइनामेन, गुगली, के साथ ही बाउंसर, यार्कर और बीमर का रूप ले लेंगी। मशीन की खास बात यह है कि इसमें लेदर बॉल के साथ ही साफ्ट सिंथेटिक, हार्ड सिंथेटिक, टेनिस बॉल को भी डाला जा सकता है।
यानी बल्लेबाज अपनी इच्छा के अनुसार हर तरह से प्रेक्टिस कर सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस मशीन को सोनकपुर स्टेडियम में रखा गया है। बल्लेबाज इस मशीन के सामने खड़े होकर प्रेक्टिस कर सकते हैं। क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी राजेश कुमार सिंह भी इस ईजाद से काफी प्रभावित हैं। आरएसओ के मुताबिक विदेशी बॉलिंग मशीन जहां तीन-साढ़े तीन लाख की आती है उसकी अपेक्षा इस मशीन की लागत एक तिहाई ही है।