मुरादाबाद। नवरात्र में कन्याओं को देवियों का स्वरूप मानकर पूजा जा रहा है, लेकिन जिले में अलग-अलग स्थानों पर मिलीं सात बच्चियां गोद लिए जाने के इंतजार में हैं। लोग देवी मां के आगे झोली फैला रहे हैं, लेकिन अपनाें द्वारा ठुकराई गईं बेटियों को गोद लेने से कतरा रहे हैं। सात बेटियां मुरादाबाद और रामपुर के दत्तक केंद्रों (एडाॅप्शन सेंटर) में गोद लिए जाने का इंतजार कर रही हैं। अब तक किसी ने इन्हें गोद लेने के लिए पहल नहीं की है।
मुरादाबाद जिले में शून्य से छह साल के निराश्रित बच्चों के लिए दत्तक केंद्र बना है। साढ़े चार माह पहले संभल रोड पर गागन के नजदीक झाड़ियों में मिली मासूम लक्ष्मी इसी दत्तक केंद्र में है। जन्म देने वाली मां ने उसे झाड़ियों में फेंक दिया था, जहां जंगली कुत्तों ने उसे निवाला बनाने की कोशिश की और उसका कूल्हा नोच खाया। कुछ लोगों की मेहनत से वह बच गई। सरकारी योजना से उसकी प्लास्टिक सर्जरी भी हो चुकी है, लेकिन बच्ची को गोद लेने के लिए कोई आगे नहीं आया है।
वहीं जिले में अलग-अलग स्थानों पर मिलीं छह अन्य बच्चियां रामपुर स्थित दत्तक केंद्र में हैं। जो लोग बच्चियों को गोद लेने के लिए आवेदन करते हैं, उनमें से ज्यादातर संपत्ति का अधिकार देने की बात पर पीछे हट जाते हैं। पिछले एक साल में सिर्फ एक सात वर्षीय बालक को गोद लिया गया है।