गांवों के प्रधान और सचिव की जांच
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ग्राम पंचायत के खातों से सरकारी धन निकालने और उसका हिसाब नहीं मिलने पर 12 से अधिक गांवों के प्रधान और सचिव की जांच शुरू हो गई है। सीडीओ के नेतृत्व में एक टीम 18 बिंदुओं पर जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट विधानसभा की उच्च समिति को सौंपी जाएगी।
डीपीआरओ वाचस्पति झा ने बताया कि विधानसभा की उच्च समिति के समक्ष पेश हुए थे। समिति के समक्ष उन्होंने 2016-17 के पंचायत के खातों से विकास कार्यों के एवज में हुए सरकारी धन के लेनदेन मामले की ऑडिट रिपोर्ट को प्रस्तुत किया।
इस मामले में समिति ने सात बिंदुओं पर सहमति जताई लेकिन 18 अन्य बिंदुओं पर सीडीओ के नेतृत्व में समिति गठित कर जांच करने के निर्देश दिए। आरोप है कि 18 बिंदुओं पर ऑडिट टीम ने आपत्ति लगाई थी। इस मामले में सीडीओ ने जांच के लिए एक समिति गठित की है।
इसमें जिला लेखा पंचायत अधिकारी और डीपीआरओ भी शामिल हैं। जिला स्तरीय समिति अपनी जांच रिपोर्ट विधानसभा की उच्च समिति को सौंपेगी। डीपीआरओ का कहना है कि जांच के दायरे में करीब एक दर्जन ग्राम पंचायतों के खाते आएंगे। अभी जिला स्तरीय समिति की बैठक नहीं हुई है।
पंचायत खाते से निकाली धनराशि, नहीं दिखाए बाउचर
ग्राम पंचायत के खाते से निकाली गई धनराशि खर्च करने के बाउचर न दिखाने और डीपीआरओ कार्यालय से जारी नोटिस का जवाब न देने पर दो पूर्व प्रधान और दो पूर्व सचिव सरकारी धनराशि का गबन के आरोप में फंस गए हैं। डीएम ने चारों से सरकारी धनराशि वसूलने के आदेश दिए है।
ब्लॉक कार्यालय के अनुसार जिला लेखा परीक्षा अधिकारी पंचायत के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-17 में ग्राम पंचायत मनकूला के लंबित ऑडिट में 29,075 रुपये की राशि के खर्च के बाउचर तत्कालीन प्रधान व सचिव ने ऑडिट टीम को उपलब्ध नहीं कराए है।
राशि की कैस बुक में एंट्री भी नहीं मिली। डीएम ने मनकूला की पूर्व प्रधान कमला देवी से 14,537 रुपये व गांव के तत्कालीन सचिव श्याम सिंह गौतम से 14,537 रुपये वसूलने के आदेश दिए हैं। उधर, दूसरा मामला ग्राम पंचायत अटवा चेंचरी का है।
डीएम ने पूर्व प्रधान से 48,600 रुपये व तत्कालीन सचिव से 48,600 रुपये वसूले जाने के आदेश दिए हैं।