राजकीय महिला पॉलीटेक्निक में कंप्यूटर साइंस अंतिम वर्ष की छात्राओं की इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग मामले में निदेशालय स्तर से जांच शुरू हो गई है। बुधवार को तीन सदस्यीय टीम के साथ पहुंचे संयुक्त निदेशक ने छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों आदि के लिखित बयान लिए। संयुक्त निदेशक का कहना है कि अनुदेशक प्रियंका की शिकायत पर जांच की जा रही है।
महिला पालीटेक्निक की कंप्यूटर अनुदेशक प्रियंका ने 14 जनवरी को निदेशक प्राविधिक शिक्षा और एक फरवरी को मुख्यमंत्री से शिकायत की है कि प्रधानाचार्य राजन सिंह के फोन पर दिए गए निर्देशों के पालन करते हुए व्हॉट्सएप ग्रुप पर छात्राओं को इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग के निर्देश दिए गए थे। इसमें सभी छात्राओं को उनके अभिभावकों द्वारा ट्रेनिंग के लिए सहमति पत्र के साथ छात्राओं के निकट के ट्रेनिंग सेंटर या इंस्टीट्यूट पर ट्रेनिंग करने की सलाह दी गई थी। छात्राओं की ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल का कार्य स्टाफ के तीन सदस्यों द्वारा किया जाता है।
समिति के समस्त कार्यों का उत्तरदायित्व समिति के अध्यक्ष का है। इसके बावजूद प्रधानाचार्य ने मानसिक उत्पीड़न करने के उद्देश्य से उन्हें जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने प्रधानाचार्य पर अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इस प्रकरण में बुधवार को संयुक्त निदेशक जेएल बत्रा, प्रधानाचार्य अमरोहा यूपी सिंह, आनंद गौड़ जांच के लिए संस्थान में पहुंचे।
मान्य होंगे छात्राओं के प्रमाण पत्र
संयुक्त निदेशक जेएल बत्रा ने बताया कि कोई भी छात्रा किसी भी इंस्टीट्यूट या ट्रेनिंग सेंटर पर जाकर इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग ले सकती है। जरूरी नहीं है कि वह विभाग के साथ समझौता किए गए संस्थान से ही प्रशिक्षण प्राप्त करें। उसे किसी इंस्टीट्यूट पर प्रशिक्षण लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। ट्रेनिंग शुल्क छह हजार रुपये हो सकता है। यह ट्रेनिंग देने वाले संस्थान की पॉलिसी हो सकती है। राजकीय महिला पॉलीटेक्निक मुरादाबाद में छात्राओं ने जिस संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उनका वहां का प्रमाण पत्र मान्य होगा।
यह है मामला
कोरोना संक्रमण काल में छात्राओं को ग्रीष्मकालीन चार सप्ताह का आनलाइन प्रशिक्षण लेना था। इसके लिए शासन स्तर से दो इंस्टीट्यूट के साथ एमओयू हुआ था। संस्था की करीब 60 छात्राओं ने दोनों इंस्टीट्यूटों के बजाय मधुबनी स्थित एक इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। वहां पर उनसे छह-छह हजार रुपये लिए गए थे। मामले में प्रधानाचार्य राजन सिंह ने संबंधित इंस्टीट्यूट पर प्रशिक्षण के लिए उनके बजाय कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा अनुमति पत्र जारी करने और छात्राओं से अधिक रुपये वसूलने की बात कही थी। प्रधानाचार्य ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की थी।
इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग प्रकरण में जांच समिति बनाई गई थी। जांच समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट में की गई संस्तुति पर प्रियंका के विरुद्ध वर्ष 2021 की वेतन वृद्धि और चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने की कार्रवाई की गई है। इसलिए अब उन्होंने मिथ्या व साक्ष्यहीन आरोप लगाए गए हैं। तृतीय श्रेणी कर्मचारी द्वारा मुख्यमंत्री को सीधे पत्राचार कर उन्होंने आचरण नियमावली 1956 का उल्लंघन किया है। मैं छात्राओं के हित में काम कर रहा हूं। इस तरह की शिकायत से छात्राओं को कोई लाभ नहीं होगा।
- राजन सिंह, प्रधानाचार्य, राजकीय महिला पालीटेक्निक।
शिक्षिका प्रियंका ने निदेशक से इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग प्रकरण में शिकायत की थी। इसीलिए जांच करने आए हैं। छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों से लिखित बयान ले लिए हैं। एक शिक्षक संजय खन्ना स्वास्थ्य खराब होने की वजह से समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुए हैं। सभी के लिखित बयान लेने के बाद 15 दिन में रिपोर्ट बनाकर निदेशक को सौंपी जाएगी।
- जेएल बत्रा, संयुक्त निदेशक, प्राविधिक शिक्षा।