परायणकर्ता ने उपस्थित अपार जनसमुदाय को संबोधित करते हुए आगे बताया कि आपके जीवन की विषम परिस्थितियां भगवान के द्वारा ली जा रही परीक्षा है। जिसे आपकी निष्ठा एवं समर्पण ही पास कराएगा। इसलिए भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा और कर्म अच्छा बनाए रखें। दुनिया जब देती है तो लोग 50 बार बोलते हैं पर भगवान शिव जब देते हैं तो वो नहीं बोलते। बल्कि भक्त कहता है कि भगवान शिव ने हमें दिया है। व्रत, पूजन और सेवा का अहंकार किसी व्यक्ति को नही करना चाहिए, अभिमान उचित नहीं है। केवल ये विचार रखिए कि जो हो रहा है, वह भोलेनाथ की कृपा का परिणाम है। हमारा कर्तव्य बस इतना है कि हम अपनी श्रद्धा भगवान शिव को समर्पित करें। अपनी पूजा में भगवान शिव से वैभव, धन सम्रद्धि ,गाड़ी, बंगला के बजाय भगवान का साथ मांगिए। जब बाबा आपके साथ होंगे तो सारी चीजें आपको प्राप्त हो जाएंगी। माता पिता गुरु कभी भेद नहीं करते, भेद की दृष्टि हमारे मन की उपज है। गंगा अवतरण की कथा से प्रारंभ कर भगवान शंकर की महिमा का दृष्टांत बताते हुए शिवलिंग का महत्व, रुद्राक्ष महत्व, तुलसी महत्व एवं द्वादश ज्योतिर्लिंगों के महत्व के विषय में विस्तार पूर्वक श्रोता समाज को बताया। कार्यक्रम के विश्राम के वक्त कथा स्थल में उपस्थित नगर पालिका अध्यक्ष चित्रक मित्तल, भाजपा नगराध्यक्ष चेजन पारुथी को आचार्य जी ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर आशीर्वाद दिया। आज के कार्यक्रम की व्यवस्था गौरव लाठे ,अरविंद शर्मा ,जागन लाल ,देवेंद्र प्रताप सिंह, सीताराम गंगवार, अंकित अग्रवाल ,धर्मेंद्र अग्रवाल शैलेंद्र अग्रवाल आदि संभाली। कथा उपरान्त भाजपा नगराध्यक्ष चेतन परूथी एवं वरुण परुथी के परिवार की और से प्रसाद वितरण किया गया। संचालन उपकार गोयल ने किया।