अगवानपुर। क्षेत्र में गोवंशों के चारे के लिए कब्जामुक्त कराई गई सरकारी भूमि पर दो साल बाद फिर से भूमाफिया का कब्जा हो गया है। यहां चारे की बुवाई होने की बजाए फसलें लहलहा रहीं हैं। जबकि सरकारी भूमि होने के बावजूद गोवंश के लिए नगर पंचायत को चारा खरीदना पड़ रहा है। 2023 में जिले के तत्कालीन डीएम मानवेंद्र सिंह के आदेश पर अगवानपुर में संचालित गोशाला के गोवांशों के चारे के लिए क्षेत्र में सरकारी भूमि को खाली कराने का अभियान चलाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में राजस्व की टीम ने इत्माली के जंगल में अलग-अलग आठ गाटा संख्या में पैमाइश की। राजस्व की टीमों ने 150 बीघा भूमि से कब्जा हटवाया। इस दाैरान टीम को विरोध का सामना करना पड़ा था। भूमि के चारों ओर गड्ढे खोदकर सीमेंट के पिलर लगा दिए गए। राजस्व टीम ने कब्जा मुक्त कराई भूमि गोशाला में पशुओं के चारे के लिए नगर पंचायत को सुपुर्द कर दी। महीनों तक नगर पंचायत ने भूमियों की निगरानी की।
कुछ भूमि पर शुरुआत में चारा भी बुवाई की गई लेकिन बाद में इन जमीनों पर भूमाफिया ने फिर से कब्जा जमा लिया। कुछ लोग कोर्ट से स्टे मिलने का दावा भी किया। ऐसे में सरकारी भूमि होने के बाद गोवंश के चारा खरीदना पड़ रहा है।
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देखरेख नहीं होने से जम जाते है कब्जे
- अगवानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में सरकारी जमीन दो हिस्सों में बंटी हैं। पहला मुस्तकम और दूसरा इत्माली। इत्माली ग्राम पंचायत के देखरेख में आती है। जबकि मुस्तकम नगर पंचायत की। राजस्व की टीम जमीन खाली कराती है और नगर पंचायत के सुपुर्द कर देती है। इत्माली की जमीनों की देखरेख नहीं होना अवैध कब्जे का कारण माना जा रहा है।
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हर दिन खरीदना पड़ता है 15 क्विंटल चारा
- अगवानपुर की कान्हा गोशाला में करीब 180 गोवंश है। प्रति जानवर के हिसाब से हर रोज 15 क्विंटल हरा चारा खरीदना पड़ता है। जबकि गोशाला के पास 150 बीघा भूमि है। वहीं जिम्मेदारों का दावा है कि जमीन कब्जे में है और बाहर से महज 10 प्रतिशत हरा चारा खरीदा जाता है।
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अभियान चलाकर करीब 150 बीघा भूमि खाली कराई गई थी। इसमें की 110 बीघा जमीन गोशाला के पशुओं के लिए नगर पंचायत के सपुर्द की गई थी। जबकि कुछ लोगों ने कोर्ट के स्टे की बात कहीं थी। इस जमीन पर गोवंश का चारा खड़ा होने का दावा किया गया है। यदि इन जमीनों पर फिर से कब्जे हुए तो जांच के बाद कार्रवाई कराई जाएगी।
- राकेश चौहान, कानूनगो अगवानपुर
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लेखपाल ने इत्माली के जंगल में गोवंशीय पशुओं के चारे के लिए 110 बीघा जमीन मुहैया कराई थी। सभी जमीन नगर पंचायत के कब्जे में है जिसमें ज्यादातर पर चारा बुवाई हो रहीं है। कुछ जमीनों पर कोर्ट से स्टे दिखाया गया है। 10 प्रतिशत चारा खरीदा जाता है। जबकि 90 प्रतिशत की बुवाई कराई जाती है।
- गुलरेज खान, अध्यक्ष नपं अगवानपुर