मुरादाबाद। यदि आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो अखबार पढ़ना आपको अपनी नियमित दिनचर्या में शामिल करना होगा। प्रतिदिन एक घंटे अखबार पढ़ने से आप किसी भी घटनाक्रम को गहराई से समझ सकेंगे और परीक्षा में पूछे गए सवालों के जवाब भी स्पष्ट रूप से दे सकेंगे। छात्राओं को ये जानकारी कटघर के थाना प्रभारी संजय कुमार ने दी। उन्होंने छात्राओं के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को भी शांत किया।
अमर उजाला की ओर से आयोजित कार्यक्रम थाना भ्रमण के तहत शनिवार को एमएच कॉलेज की छात्राओं ने थाना कटघर का भ्रमण किया। छात्राओं ने महिला हेल्पडेस्क, हवालात, कार्यालय, मालखाना आदि का भ्रमण किया और पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की। संजय कुमार ने कहा कि कॉलेज में दाखिला लेने के तीन वर्षों तक पूरा ध्यान कॅरिअर पर केंद्रित कर देना जरूरी है। वर्तमान में सोशल मीडिया का प्रयोग बढ़ गया है। कई बार अनजान नंबर से आई वीडियोकॉल और लिंक को हम क्लिक कर देते हैं। साइबर अपराधी गलत वीडियो बना लेते हैं या फिर बैंक अकाउंट से रुपये निकाल लेते हैं। इसलिए साइबर अपराधों से बचना है तो लालच में नहीं पड़ना है। इस दौरान सतेंद्र सिंह उज्जवल, मोनू आर्य, वाणी गुप्ता, मोहिनी, खुशी ठाकुर आदि मौजूद रहीं।
सवाल : यूपी पुलिस की नौकरी करना चाहती हूं। इसकी तैयारी कैसे करूं।
निदा, छात्रा
जवाब : किसी भी परीक्षा में सफल होने के लिए जितना जरूरी विषयों की पढ़ाई करना है, उतना ही ज्यादा जरूरी समय प्रबंधन है। आपको अपने रुटीन के हिसाब से पढ़ाई का समय निर्धारित करना होगा।
सवाल : मैंने सुना है कि पुलिस रात में अकेले किसी भी व्यक्ति को घर तक छोड़ती है, क्या यह सही है।
ज्योति सैनी, छात्रा
जवाब : हर विपरीत परिस्थिति में सबसे पहली मददगार पुलिस ही होती है। इसके लिए रात या दिन नहीं देखा जाता है। कई ऐसे मामले हुए हैं, जहां पर पुलिस ने रात में लोगों को उनके घर सकुशल पहुंचाया है।
सवाल: पुलिस विभाग में कितने वर्षों तक रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
रिंकी यादव
जवाब: जब से थाना खुला है, तब तक का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। अब तो रिकॉर्ड ऑनलाइन भी रहता है, लेकिन पहले रजिस्टर में दर्ज किया जाता था और वर्षवार उसे सुरक्षित रख दिया जाता था।
सवाल : क्या आपराधिक रिकॉर्ड से नौकरी मिलने में परेशानी होती है।
संजना, छात्रा
जवाब: हां, यदि किसी का रिकॉर्ड अपराधी के रूप में दर्ज हो जाता है तो सरकारी ही नहीं, बल्कि कई निजी कंपनियां भी ऐसे युवाओं को नौकरी नहीं देती हैं। पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन होने की वजह से एक क्लिक पर पूरी जानकारी सामने आ जाती है।