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खनन सिंडिकेट की कमर तोड़ने पर मिली ट्रांसफर की ‘सौगात’

Fri, 26 Aug 2016 11:33 AM IST
उमेश शर्मा/अमर उजाला/मुरादाबाद
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ट्रांसफर - फोटो : demo
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 जिले की दो युवा तेज तर्रार महिला अधिकारियों को राशन माफिया और खनन सिंडिकेट से पंगा लेना महंगा पड़ा। माफिया पर नकेल कसने की एवज में इनाम के बजाए सरकार ने दोनों लेडी आफिसर को एक साथ ट्रांसफर की ‘सौगात’ दी है। आईएएस हर्षिता माथुर और आईपीएस सुजाता सिंह की जोड़ी ने गरीबों के राशन पर डाका डालने वालों के साथ ही खनन माफिया का जीना मुश्किल कर दिया था। दोनों अधिकारियों के तेवरों से घबराए राशन माफिया और खनन सिंडिकेट ने एकजुट होकर एक विधायक की अगुवाई में कई दिन से लखनऊ में डेरा डाल रखा था। 
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युवा आईएएस अधिकारी हर्षिता माथुर और आईपीएस सुजाता सिंह अपनी तैनाती के बाद से ही राशन- खनन माफिया और अपराधियों के खिलाफ बोल्ड स्टेप उठाने की वजह से सुर्खियों में रही हैं। सियासी दबाव को दरकिनार करके दोनों अधिकारियों ने कई बार सत्ताधारी दल के कई नेताओं के करीबियों को भी सलाखों तक पहुंचाया है। तैनाती के बाद से ही हर्षिता माथुर का फोकस गरीबों के राशन को डकारने वाले खनन माफिया पर नकेल कसने में रहा। वहीं सुजाता सिंह ने महिला अपराधों में सख्त कदम उठाने के साथ ही और खनन सिंडिकेट के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई की थीं। 

दोनों महिला अधिकारी अपने काम में सियासी दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं करती थीं। नेताओं की सिफारिशों को अनसुना करने की वजह से ही दोनों अधिकारी नेताओं की आंखों की किरकिरी बनी थीं। पहले लोकल लेवल पर बड़े अधिकारियों पर दबाव डालकर नेताओं ने इनके तेवर नरम कराने चाहे लेकिन जब बात नहीं बनी तो लखनऊ की दौड़ लगा दी।
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दोनों की वजह से खनन सिंडिकेट और राशन माफिया का करोड़ाें रुपये महीने का नुकसान हो रहा था। पर्दे के पीछे से सिंडिकेट में शामिल नेता दोनों अधिकारियों की इस सख्ती से बिलबिला उठे थे। गुरुवार को लखनऊ में दोनों अफसरों के खिलाफ सिंडिकेट ने आखिरी वार किया और नतीजे के तौर पर शाम होते - होते सुजाता सिंह के मऊ और हर्षिता माथुर के बलिया तबादले के आदेश आ गए।

करोड़ों रुपये का है राशन और खनन का काला कारोबार
मुरादाबाद (ब्यूरो)। जिले में राशन और खनन का काला कारोबार करोड़ों रुपये महीने का है। यही वजह है कि अपने - अपने इलाके में कमोबेश ज्यादातर नेता अपनी- अपनी हैसियत के हिसाब से इसमें हिस्सेदार हैं और उन्हीं की सरपरस्ती में पूरा खेल चल रहा है। राशन की दुकानों पर पहुंचने से पहले की केरोसिन की कालाबाजारी हो जाती है और सस्ता गल्ला भी गरीबों तक नहीं पहुंच पाता है।

स्थिति यह है कि कलेक्ट्रेट तक पहुंचने वाली हर दूसरी शिकायत राशन नहीं मिलने की होती है। लेकिन सियासी दबाव के चलते अफसर खुद को असहाय पाते हैं। लेकिन युवा आईएएस हर्षिता माथुर ने सियासी दखल को दरकिनार करके राशन माफिया की कमर तोड़ दी थी। उधर, आईपीएस सुजाता सिंह ने हर्षिता के साथ मिलकर अवैध खनन करने वालों की रीढ़ तोड़ दी थी। ठाकुरद्वारा में उत्तराखंड के बार्डर पर खनन सिंडिकेट ने कानून को ताक पर रखकर खुलेआम अपनी अवैध चेकपोस्ट खोल दी थी। जहां प्रति ट्रक वसूली होती थी। कोई अफसर इन पर हाथ नहीं डालता था लेकिन दोनों लेडी आफिसर ने यहां छापा मारकर खनन सिंडिकेट को हिला दिया था।
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