दहेज हत्या के मामले में अदालत ने दोषी करार दिए गए पति को आठ साल के कठोर कारावास की सजा के साथ तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसी मामले में अन्य सह अभियुक्तों की सुनवाई अभी अदालत में चल रही है।
संभल के बहजोई के रहने वाले शकील ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें कहा कि उसकी बहन आसमीन की शादी आटा गांव के रहने वाले मुख्तियार उर्फ आरिफ के साथ छह सात साल पहले हुई थी। शादी के बाद उसकी बहन को सुसराल वाले तंग करते थे। जिनमें उसका पति मुख्तियार उर्फ आरिफ, ससुर मुबारक, सास जुवैदा ननद रूबी आए दिन मेरी बहन को कम दहेज लाने का ताना देते और उसके साथ मारपीट करते थे। धमकी देते थे कि मुख्तियार की दूसरी शादी करा देंगे। इससे हमें और भी दहेज मिल जाएगा। इस दौरान मेरी बहन के तीन बेटियां हो गईं थी। जिसके बाद बहन के सुसराल वालों का जुल्म और बढ़ गया था। 15 सितंबर 2013 की सुबह मेरे पास फोन आया कि तुम्हारी बहन ने आत्महत्या कर ली है। शकील अपने परिवार के लोगों साथ बहन की सुसराल गया तो देखा कि आसमीन मृत पड़ी थी। जिसके शरीर पर चोटों के निशान भी हैं। इस मामले में पुलिस ने पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार यादव ने बताया कि इस मामले में अदालत ने अन्य आरोपी मुबारक, जुवैदा, और रूबी को भी बाद में तलब कर लिया था। जिनकी पत्रावली अलग कर दी गई है। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या एक मोहम्मद फिरोज की अदालत में की गई। पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य के आधार पर अदालत ने आरोपी पति मुख्तियार उर्फ आरिफ को दोषी करार देते हुए उसे आठ साल के कठोर कारावास की सजा के साथ उस पर तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। संवाद