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Moradabad News: आवास जर्जर, कर्मचारी परेशान... खतरे में जान

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मुरादाबाद। गंभीर बीमारियों से लोगों को बचाने वाले डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ खुद खतरे के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। जिला अस्पताल परिसर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों के आवास जर्जर हैं। शनिवार की देर रात एक आवास की दीवार भरभरा गिर गई। वहां रह रहे लोग बाल-बाच बचे।
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अस्पताल परिसर में 80 से ज्यादा आवास हैं। इनमें से लगभग 20 आवास कई साल पहले जर्जर हो चुके हैं लेकिन उन्हें अब तक गिराया नहीं गया। इनके आवास किसी आवास की छत टपकती है को किसी का फर्श वर्षों से टूटा है। दो साल से किसी आवास में पुताई नहीं हुई है। दीवार गिरने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने टीम गठित की है। इसमें डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ को शामिल किया गया है, जिससे जर्जर आवासों को चिह्नित किया जा सके। कुछ आवास पीडब्ल्यूडी के अधिकार क्षेत्र में हैं इसलिए उन्हें पत्र लिखा गया है। जर्जर आवासों को खंडहर घोषित कर ध्वस्त करने की अपील की गई है।
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप बडोला का कहना है आवासों की मरम्मत के लिए अस्पताल के पास बजट नहीं है। यह मुद्दा एसआईसी के सामने उठाया जा चुका है। सिर्फ आवास ही नहीं, अस्पताल की तीसरी मंजिल की हालत भी खराब है। ओपीडी की बिल्डिंग की मरम्मत व पुताई का कार्य लंबित है। परिसर में करीब 35 परिवार खतरे के बी जीवन यापन कर रहे हैं। टाइप-ए के आवासों में भी फर्श टूटे हैं। कर्मचारी एचआरए देने के बावजूद इन आवासों में रह रहे हैं। 2000 से लेकर 14000 तक एचआरए कर्मियों व डॉक्टरों के सकल वेतन से कटता है।
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आवासों के प्रकार व संख्या
चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के आवास - 42
समूह-ग के आवास के - 26
डॉक्टरों के आवास - 16

आजादी से पहले बनें हैं, कर्मचारी जमाए हैं कब्जा
परिसर में कई आवास ऐसे हैं जो 1947 से पहले के बने हुए हैं। कुछ आवासों पर कर्मचारियों ने कब्जा जमा रखा है। खाली व खंडहर आवासों में सामान रख रखा है। यह आवास पीएसी की जमीन पर थे लेकिन बाद में स्वास्थ्य विभाग के हवाले कर दिए गए। कुछ कर्मचारियों ने टीन शेड डलवा लिए हैं और निर्माण भी करा लिया है। अब हादसे की दस्तक के बाद स्वास्थ्य विभाग गहन सर्वे करा रहा है, सभी जर्जर आवासों को ध्वस्त कराने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को भी मामला भेजा जाएगा।

वर्जन
आवासों की मरम्मत का मुद्दा अस्पताल प्रबंधन के सामने उठाया जा चुका है। कई आवासों की स्थिति ऐसी है कि किसी मेहमान के आने पर कर्मचारियों को शर्मिंदगी महसूस होती है। दिवाली से पहले अस्पतालों की मरम्मत व रंगाई-पुताई की मांग है।
- हेमंत चौधरी, जिला मंहामंत्री, अटेवा

आवासों की मरम्मत के लिए बजट शासन से आना है। इसके लिए पत्र लिख दिया गया है। पुताई कराने का नियम तीन साल का है। 2023 में आवासों की पुताई हुई थी और अब 2026 में होगी। जर्जर आवासों का सर्वे कराने के लिए टीम गठित की गई है।
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- डॉ. संगीता गुप्ता, एसआईसी
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