मुरादाबाद। होलिका दहन भद्रा काल में नहीं किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित ऋिषीकेश शुक्ल के अनुसार इस बार दोपहर एक बजकर दस मिनट तक भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसके बाद शाम छह बजकर 35 मिनट से रात आठ बजकर 55 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा और इसी बीच होलिका दहन किया जाएगा। होलिका दहन के दिन शुभ योग में सर्वोत्तम योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर होलिका दहन करना है, उसे गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद वहां सूखे उपले, लकड़ी, घास आदि रखें। पूर्व दिशा की तरफ मुख करके बैठेें। यदि चाहें तो गाय के गोबर से होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमाएं भी बना सकते हैं। इसके साथ ही भगवान नरसिंह की पूजा करें। पूजा के समय एक लोटा जल, माला, चावल, रोली, सात प्रकार के अनाज, फूल, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, बताशे, गुलाल, होली पर बनने वाले पकवान और नारियल रखें। साथ ही नई फसलें भी रखी जाती हैं। जैसे परंपरा के तौर पर चने और जौ की बालियां रख सकते हैं। कच्चे सूत को हालिका के चारों तरफ तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटें। उसके बाद सभी सामग्री होलिका दहन की अग्नि में समर्पित करें।