हिट एंड रन कानून में सख्ती बढ़ाए जाने के बाद चालकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। रोडवेज और निजी बसों के नहीं चलने से यात्रा इधर-उधर भटकते रहे। शाम होते ही पेट्रोल पंपों की भीड़ लग गई। कई जगहों पर तेल खत्म होने की स्थिति भी आ गई। कई जगहों पर हालात बिगड़ते-बिगड़ते बचे।
अधिकारियों ने बताया कि अमरोहा डिपो से मात्र 18 बसों का संचालन लोकल रूटों के लिए हुआ। दूर-दराज जाने के लिए यात्रियों को सुविधा नहीं मिल सकी। जोया और गजरौला के चौपला पर यात्री बसों का इंतजार करते रहे। एआरएम मोहम्मद शफी ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को हुई हड़ताल से रोडवेज को 15 लाख का घाटा हुआ है।
उधर, ट्रांसपोर्टरों को भी दो दिनों में 65 लाख का नुकसान हुआ है। यहां से दिल्ली, बनारस, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर आदि के लिए भेजी जाने वाली सब्जी की सप्लाई नहीं हो सकी। जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। वह लोकल में सस्ते दामों में सब्जी बेचने को मजबूर हैं। संभल में वाहन चालकों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही।
आदमपुर रोड पर विरोध प्रदर्शन के दौरान वाहन चलाने वालों को जूतों की माला पहनाकर अपमानित भी किया। विरोध पर एक ट्रैक्टर चालक की पिटाई कर दी गई। रजपुरा में विरोध प्रदर्शन के दौरान नोकझोंक हुई है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि जिले में तीन दिन के अंदर करीब 20 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
शहर के पंपों पर पेट्रोल और डीजल खत्म होने के कगार पर है। दूसरी ओर रोडवेज बसों के चालक काम पर लौट आए हैं। अनुबंधित बसों का करार खत्म करने की चेतावनी के बाद वह काम पर लौटे हैं। परिवहन विभाग ने अनुबंध करार खत्म करने का चेतावनी पत्र मंगलवार को ही जारी किया है।
रामपुर में हड़ताल का व्यापक असर दिखा। दूसरे दिन रामपुर डिपो के अधिकारियों ने 18 बसों का संचालन शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि इन बसों को कम किलोमीटर वाले रूटों पर उतारा गया है। इसमें मुरादाबाद, बरेली और रुद्रपुर-हल्द्वानी को रवाना किया गया है। शाम चार बजे किसी अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
निजी बस संचालकों की एआरटीओ और एआरएम के साथ बैठक हुए। ट्रक चालकों की हड़ताल अभी भी जारी है।