मुरादाबाद। जिला अस्पताल अब सिर्फ सामान्य इलाज तक सीमित नहीं रह गया है। यहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जटिल ऑर्थोपेडिक सर्जरी भी संभव हो रही हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल में रहमतनगर करूला निवासी 54 वर्षीय सरदार खां के कूल्हे का सफल प्रत्यारोपण किया गया। निजी अस्पतालों में इसी सर्जरी पर करीब तीन लाख रुपये तक खर्च आता है, जबकि जिला अस्पताल में यह ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क हुआ।
करूला निवासी मरीज सरदार खां ने बताया कि वह चार माह से चल नहीं पा रहे थे। कई डॉक्टरों को भी दिखाया लेकिन किसी ने हड्डी टूटने की बात नहीं पकड़ी। वह लगातार नसों की बीमारी का इलाज कराते रहे, जोकि कभी थी ही नहीं। 16 जनवरी को वह अपनी पत्नी फूल जहां के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। वहां भी फिजिशियन को दिखाया तो उन्होंने ऑर्थो सर्जन के पास रेफर किया। ऑर्थो सर्जन ने मरीज की परेशानी समझने के बाद एक्सरे किया तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इसमें बाएं कूल्हे की हड्डी बुरी तरह क्षतिग्रस्त पाई गई। मरीज का कहना है कि उनके कोई चोट नहीं लगी, न ही कोई दुर्घटना हुई। इसलिए हड्डी चकनाचूर होने का अंदाजा नहीं लगा सके। आयुष्मान भारत योजना के बजट से निजी कंपनी ने कूल्हा खरीदने के बाद मंगलवार को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया।
यह वास्तव में चौंकाने वाली बात थी कि मरीज चार महीनों से नसों का इलाज करा रहे थे, जबकि दिक्कत हड्डी में थी। बिना चोट लगे हड्डी कैसे टूट गई। इसका कारण तलाशने के लिए वरिष्ठ और विशेषज्ञ चिकित्सकों को केस के विषय में बताया गया है। हड्डी के इतना कमजोर होने की वजह जानने की कोशिश जारी है।
- डॉ. शोभित सिंह, ऑर्थो सर्जन